कानपुर, [गौरव दीक्षित]। पिछले वर्ष सितंबर में गोरखपुर के एक होटल में रुके शहर के प्रापर्टी डीलर मनीष गुप्ता की बर्बर पिटाई कर हत्या के मामले में अब एक नई जानकारी सामने आई है। इससे पता चलता है कि पिटाई करने वाले रामगढ़ताल थाने के इंस्पेक्टर और मातहत नहीं चाहते थे कि घायल मनीष जिंदा बचें। विशेष जांच दल (एसआइटी) की जांच में यह बड़ा रहस्य खुला है कि आरोपित पुलिसकर्मी मनीष को लेकर मानसी अस्पताल पहुंचे तब वह जिंदा थे।

अस्पताल से गोरखपुर मेडिकल कालेज लेकर पहुंचे तो डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। यहां सबसे अहम बात यह है कि मानसी अस्पताल से महज 13-14 मिनट की दूरी पर मेडिकल कालेज में पुलिसकर्मी मनीष को डेढ़ घंटे बाद लेकर पहुंचे। ऐसा क्यों? यही बड़ा सवाल है, जो साजिश की ओर इशारा करता है। क्या पुलिसकर्मी तब तक मनीष को लेकर इधर-उधर भटकते रहे, जब तक उनकी मौत नहीं हो गई।

यह हुआ था उस दिन : दोस्तों के साथ गोरखपुर घूमने गए कानपुर के बर्रा निवासी मनीष गुप्ता की रामगढ़ताल इलाके के होटल कृष्णा पैलेस में 27 सितंबर 2021 की रात पुलिसकर्मियों ने बर्बर पिटाई कर हत्या कर दी थी। 29 सितंबर को उनकी पत्नी मीनाक्षी की तहरीर पर रामगढ़ताल थाने में तैनात रहे थाना प्रभारी जगतनारायण सिंह, दारोगा अक्षय मिश्र, राहुल दुबे, विजय यादव, मुख्य आरक्षी कमलेश यादव और आरक्षी प्रशांत पर हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ था। बाद में इस केस की सीबीआइ ने जांच की और सभी पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या की धाराओं में चार्जशीट लगाई। सीबीआइ से पहले मामले की जांच संयुक्त पुलिस आयुक्त आनंद प्रकाश तिवारी के नेतृत्व में बनी एसआइटी ने भी की थी।

घटनाक्रम सुबूतों की जुबानी : पुलिस ने होटल कृष्णा के सीसीटीवी कैमरे, मानसी अस्पताल और मेडिकल कालेज के दस्तावेजों को खंगाला था।

-12.04 बजे रात के, पुलिस वाले होटल में दाखिल हुए और डेढ़ से दो मिनट बाद मनीष के कमरे में थे।

-12.25 बजे पुलिस घायल मनीष को उसके कमरे से लेकर निकली।

-12.29 बजे मनीष को जीप में डाला।

-12.35 बजे पुलिस पड़ोस के मानसी अस्पताल ले गई।

-12.44 बजे अस्पताल से जीप में डालकर मेडिकल कालेज ले गई।

-2.15 बजे मनीष को मेडिकल कालेज में दाखिल कराया गया, जैसा वहां के दस्तावेज बताते हैं।

एसआइटी ने ऐसे की जांच-पड़ताल : एसआइजी ने मानसी अस्पताल के स्टाफ, जीप में मिले खून व अन्य जांच बिंदुओं के आधार पर माना था कि मनीष अस्पताल लाए जाने तक जिंदा थे। मेडिकल कालेज ले जाने में देरी क्यों बरती गई, पुलिस उन्हें लेकर कहां घूमती रही, इसका पता नहीं चला।

Edited By: Abhishek Agnihotri