जागरण संवाददाता, कानपुर : 'चिराग तले अंधेरा..।' यह मुहावरा शायद कानपुर के मौजूदा हाल जैसी ही किसी परिस्थिति पर गढ़ा गया होगा। पूरे प्रदेश में निवेशकों के लिए सकारात्मक माहौल बनाने और औद्योगिक विकास के ख्वाब संजोए-दिखाए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री की इसके प्रति गंभीरता नजर भी आ रही है। मगर, इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या होगा कि खुद औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना का गृहनगर कानपुर ही इन उम्मीदों से बाहर होता नजर आ रहा है। नए विकास, नए निवेश की बातें बाद की हैं। पहले से अटके या समस्याओं से जूझ रहे औद्योगिक क्षेत्रों की समस्याओं के निस्तारण और विकास के लिए एक साल में एक कदम तक नहीं उठाया गया है।

कानपुर की पूरे औद्योगिक परिदृश्य और इस ओर हुए प्रयासों को देखेंगे तो निराशा ही हाथ लगेगी। उन्नाव जिले में गंगा बैराज पर बसाई जा रही ट्रांसगंगा सिटी और मंधना में प्रस्तावित इंटीग्रेटेड टाउनशिप में किसानों से चल रही मुआवजे की रार को अभी तक नहीं सुलझाया जा सका है। किसानों के साथ कोई संवाद नहीं किया है। यूपीएसआइडीसी के अधिकारियों या मंत्री द्वारा शहर के उद्यमियों से यह तक जानने की कोशिश नहीं की गई है कि औद्योगिक क्षेत्रों में कौन सी सुविधाएं चाहिए। समस्याओं से जूझते उद्यमी कैसे निवेश करेंगे? यह समझ से परे है।

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चकेरी औद्योगिक क्षेत्र का यह हाल

चकेरी औद्योगिक क्षेत्र में पेयजल, सड़क, सीवर आदि की उपलब्धता नगण्य है। पानी की टंकी तो है, लेकिन पानी की आपूर्ति नहीं होती। टूटी सड़कों की मरम्मत भी नहीं की गई है। अगर यह मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हों तो यहां प्लाट लेने वाले लोग जरूर औद्योगिक इकाई स्थापित करें। इस औद्योगिक क्षेत्र में उद्योग लगाने के बाद उद्यमियों को चकेरी-पाली रोड पर स्थित दिल्ली-हावड़ा रूट की रेलवे क्रासिंग पर जाम से जूझना होगा। यह क्रासिंग हर रोज दो सौ से अधिक बार बंद होती है। ऐसे में यहां निवेश करने से लोग कतराते हैं। केंद्र और प्रदेश में भाजपा की सरकार है। ऐसे में औद्योगिक विकास मंत्रालय चाहता तो क्रासिंग पर ओवरब्रिज बनना शुरू हो जाता। औद्योगिक क्षेत्र में सुविधाएं विकसित होतीं।

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पनकी में सीवर लाइन समस्या

पनकी औद्योगिक क्षेत्र में सीवर लाइनें जाम हैं। बरसात के दिनों में जल निकासी नहीं हो पाती है और पानी औद्योगिक इकाइयों में भर जाता है। माई कार के सामने की सड़क पिछले तीन वर्षो से टूटी हुई है, जिसे आज तक बनाया नहीं जा सका है। औद्योगिक क्षेत्र में एक सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट नहीं है। ऐसे में उद्यमियों को आए दिन प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से बंदी का नोटिस मिलता है। न तो इस समस्या का समाधान यूपीएसआइडीसी कर रहा है और न ही सरकार को चिंता है। हालत यह है कि औद्योगिक कचरा खारजा नहर से होते हुए पाडु नदी में जाता है और फिर यही आगे जाकर गंगा को मैला कर रहा है।

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रूमा में नहीं हल हो सका विवाद

रूमा औद्योगिक क्षेत्र में एक दर्जन भूखंड ऐसे हैं, जिन पर आवंटियों को कब्जा नहीं मिल पा रहा है। जब भी कोई आवंटी इकाई स्थापित करने जाता है तो किसान रोक देते हैं, मारपीट पर उतारू हो जाते हैं। यहां भी पानी की टंकी है, लेकिन उससे आपूर्ति नहीं होती है। रूमा और चकेरी औद्योगिक क्षेत्र तो औद्योगिक विकास मंत्री के विधानसभा क्षेत्र में ही आता है।

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ट्रांसगंगा में फंसे अरबों रुपये

गंगा बैराज पर बसाई जा रही ट्रांसगंगा सिटी में 1151 एकड़ भूमि है। यहां आधा दर्जन औद्योगिक भूखंड बिक चुके हैं। एक हजार से अधिक आवासीय भूखंड आवंटित हो चुके हैं। किसान यूपीएसआइडीसी को विकास नहीं करने दे रहे हैं। मजबूरन लोग भूखंड सरेंडर कर रहे हैं, ऐसा कर उन्हें आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। यहां मुआवजा बढ़ाने को लेकर आंदोलित तीन दर्जन किसानों से बातचीत कर मुद्दे को हल किया जा सकता था, लेकिन अभी तक कोई पहल नहीं हुई। यहां विकास हो जाए तो तमाम बड़े निवेशक आ सकते हैं। अभी कोई भूमि मांगे भी तो प्रबंधन उसे आवंटित नहीं कर सकता।

मंधना में टाउनशिप का सपना अधर में

मंधना में भी इंटीग्रेटेड टाउनशिप इसलिए नहीं बस पाई है, क्योंकि किसान मुआवजा बढ़ाने की मांग कर यूपीएसआइडीसी को काम नहीं करने देते। किसानों के साथ बैठक कर उनकी मांगों को सुनने और समाधान कराने पर किसी का ध्यान ही नहीं है। उद्यमियों को यहां निवेश करने के लिए यूपीएसआइडीसी के अफसर प्रेरित कर रहे हैं। सवाल यह है कि जब भूमि कब्जे में नहीं है तो उद्यमियों के साथ छलावा क्यों किया जा रहा है।

लेदर क्लस्टर से जुड़े उद्यमी परेशान

रमईपुर में मेगा लेदर क्लस्टर बसाने की योजना चार साल पहले बनी थी। यूपीएसआइडीसी प्रबंधन ने कुछ उद्यमियों के साथ मिलकर स्पेशल परपज व्हीकल के तहत कंपनी गठित की। उद्यमियों ने भूमि खरीद ली, लेकिन प्रबंधन और उद्यमियों के बीच कुछ मुद्दों पर रार शुरू हो गई। यह मुद्दा सुलझाने के बजाय रमईपुर में ही सेनपूरब पारा गांव में अलग से क्लस्टर के लिए यूपीएसआइडीसी भूमि ले रहा है जबकि पूर्व में भूमि लेने वाले उद्यमियों के साथ बैठक कर मामले को सुलझाया जा सकता है।

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एक और आश्वासन..

समस्याओं का समाधान जल्द : महाना

औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना का कहना है कि जल्द ही समस्याओं का समाधान होगा। चकेरी-पाली रोड स्थित रेलवे क्रासिंग पर ओवरब्रिज के निर्माण के लिए रेल मंत्री से बातचीत की है। उन्होंने इस पर सैद्धांतिक सहमति भी दे दी है। रही बात ट्रांसगंगा सिटी की तो वहां पर कुछ अनियमितताओं की जांच चल रही है। जल्द ही वहां काम शुरू होगा। किसानों से बातचीत भी हो रही है। मंधना में प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्र के बारे में अभी जानकारी नहीं है। एमडी यूपीएसआइडीसी से जानकारी लूंगा। अन्य औद्योगिक क्षेत्रों की भी समस्याएं समाप्त कराई जाएंगी।

By Jagran