कानपुर, [जागरण स्पेशल] राम मंदिर आंदोलन के दौरान एक दौर ऐसा भी आया जब गिरफ्तारी से बचने के लिए प्रमुख लोगों ने अपना वेश बदल लिया था। जिनको अपनी दाढ़ी बहुत प्रिय थी, वे उसे कटवा चुके थे। जो नेता क्लीन शेव नजर आते थे, दाढ़ी बढ़ा चुके थे। हरी गुरु के नाम से मशहूर हरी दीक्षित ने तो अपना रूप इस कदर बदल लिया था कि गोपनीय बैठकों में तमाम लोग उन्हें पहचान ही नहीं पाते थे।

जगतवीर के पास थी आंदोलन की बागडोर

यह वो दौर था जब 28 दिन के अभियान में रोज गिरफ्तारी दी जा रही थी। राम मंदिर आंदोलन के दौरान 1989 के अंत में गिरफ्तारी देकर जेलें भरने का कार्यक्रम आया। उसी वर्ष लोकसभा चुनाव लड़ चुके जगतवीर सिंह द्रोण को कानपुर नगर में इस आंदोलन की बागडोर सौंपी गई थी। सबके लिए दिन तय था और निर्देश थे कि उससे पहले कोई गिरफ्तार नहीं होगा क्योंकि उस दिन के आंदोलन पर प्रभाव पड़ता। इस अभियान में गिरफ्तारी की शुरुआत ईश्वर चंद्र गुप्ता के नेतृत्व में निकले कार्यकर्ताओं से हुई। संघ, विहिप, भाजपा से जुड़े लोगों की गिरफ्तारी होने लगी थी। इसके बाद सभी को भेष बदल कर भूमिगत होने और तय दिन पर गिरफ्तारी देने के निर्देश दिए गए।

रोजाना बदल देते थे ठिकाना

हमेशा क्लीन शेव रहने वाले जगतवीर सिंह द्रोण ने दाढ़ी बढ़ा ली थी। अपनी स्कूटर से पहचान न लिए जाएं, इसलिए भतीजे से स्कूटर तक बदल दी। जगतवीर सिंह द्रोण के मुताबिक पुलिस उन लोगों को गिरफ्तार करने के लिए घूम रही थी। जिस घर में एक दिन रहता था, वहां दूसरे दिन नहीं रहता था। उस वर्ष की दीपावली तक वह अपने घर में नहीं मना सके थे।

हरी दीक्षित ने तो अपने आपको पूरी तरह बदल लिया था। उनकी लंबी दाढ़ी कट चुकी थी। धोती की जगह जींस और कुर्ते की जगह टी-शर्ट ने स्थान ले लिया था। पैरों में स्पोर्ट्स शूज रहते थे। लोगों के बीच से आराम से वह चश्मा लगाए गुजर जाते थे लेकिन, कोई पहचान नहीं पाता था। कई बैठकों में तो पदाधिकारी तक पहचान नहीं पाए थे।

बालों का विग लगाकर छिपाई पहचान

बजरंग दल की टीम को सक्रिय करने वाले प्रकाश शर्मा के घर पर कई बार पुलिस पहुंची तो वह भी भूमिगत हो गए। उन्होंने दाढ़ी सेट करवा ली थी और फ्रेंच कट की तरह मूंछें रख ली थीं। कुछ हिप्पी कट स्टाइल बनाने के लिए लंबे बालों का विग भी लगा लिया था। कानों के ऊपर तक घने बाल और काला चश्मा पहनने लगे। कुर्ते की जगह शर्ट ने ली ली और उसके भी तीन बटन खुले रहते थे। प्रकाश शर्मा के मुताबिक इस रूप ने उन्हें छिपने में काफी मदद की। संघ में जिला प्रचारक रह चुके काशीजी ने बेलबॉटम पहनना और हैट लगाना शुरू कर दिया था।

Posted By: Abhishek Agnihotri

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