कानपुर, जेएनएन। राम मंदिर आंदोलन के दौरान रामलला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे... का नारा कारसेवकों की जुुबान पर बना रहता था। यह नारा उन्हें एक उत्साह देता था। एक उम्मीद जगाता था कि वो दिन भी कभी न कभी आएगा जब अयोध्या में भव्य मंदिर बनेगा। तमाम मौकों पर इस नारे को लेकर कटाक्ष भी हुए लेकिन रामभक्तों ने उम्मीद कभी नहीं छोड़ी।

वर्ष 2014 में केंद्र में भाजपा की सरकार आने के बाद जिस तेजी से पार्टी के एजेंडे से जुड़ी चीजों को एक-एक कर पूरा किया जाने लगा, उससे लोगों को यह उम्मीद भी मजबूत हो गई थी कि राम मंदिर आंदोलन का नारा जल्द पूरा हो जाएगा। जिन लोगों ने उस दौर में लाठियां खाईं, आज उनकी पीड़ा अयोध्या में भूमि पूजन देखकर खत्म हो गई।

हिंदू संगठन के पदाधिकारी बोले

  • जोश तो आज भी बरकरार है और अब तो यह पूरी दुनिया का जोश बन गया है। अपने लगाए हुए नारे को पूरे होते देख बहुत प्रसन्नता हो रही है। सभी पंथ के लोगों ने इसे स्वीकार कर लिया है। अब मंदिर तो धीरे-धीरे बनता ही रहेगा। -डॉ. रमेशचंद्र शर्मा, पूर्व प्रांतीय उपाध्यक्ष, विश्व हिंदू परिषद।
  • राम मंदिर आंदोलन के दौरान गिरफ्तारी देना और नारे लगाना उत्साहित करता था। कभी-कभी यह भी लगता था कि जो नारे हम लगाते रहे हैं, उसे पूरा होते अपनी जीते-जी देख सकेंगे या नहीं। आज भूमि पूजन के साथ लग रहा है कि सबकुछ पा लिया। -दीनदयाल गौड़, प्रांतीय सह मंत्री, विश्व हिंदू परिषद।
  • रामलला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे...का नारा लगाने वाले लाखों स्वयंसेवकों की तपस्या आज सफल हो गई। राम मंदिर का निर्माण हर भारतवासी के लिए गौरव की बात है। मंदिर आदोलन मेें कानपुर के लोगों का योगदान हमेशा याद रखा जाएगा। -काशीराम, पूर्व प्रचारक, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ।

Posted By: Abhishek Agnihotri

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