कानपुर, जेएनएन। 'हां, मुकेश बोल रहे...कानपुर का समाचार मिला कि नहीं।' रिश्तेदार बोला-'क्या हुआ?' मुकेश बोला- 'कुछ नहीं समझा रहे थे तो सब हल्के में ले रहे थे। न तो हीरालाल समझे न ही मनीषा। जब नहीं मानें तो 20 लीटर पेट्रोल डाल आग लगा अंजाम कर दिया। अब कितने मरे या जिंदा हैं, पता नहीं। तुम अपनी तैयारी कर लो। तुमको तो कानपुर जाना पड़ेगा।' शातिर मुकेश ने घटना को अंजाम देने के बाद जायजा लेने के लिए एक रिश्तेदार को फोन किया था जो दोनों परिवारों का करीबी है। फोन करके उसने करीब चार मिनट से अधिक बातचीत की। रिश्तेदार से बातचीत का ऑडियो इंटरनेट मीडिया में वायरल हुआ है। हालांकि, इस ऑडियो की पुष्टि दैनिक जागरण नहीं करता है।

बातचीत के दौरान रिश्तेदार का कहना था कि मेरे पास तो नंबर ही नहीं है और फिर तुम सच कह रहे हो या झूठ, क्या मालूम। मुकेश ने कहा, फोन कर लो। नहीं तो कुछ देर और इंतजार करो, फोन आ जाएगा। इस पर रिश्तेदार ने कहा कि यह करने की तुम्हें क्या जरूरत थी, तुम्हारा भी तो बेटा वहां था। मुकेश बोला, क्या हुआ एक लड़का न सही। कई बार समझाया, कोई नहीं माना। मनीषा को बोला था कि अगर जिंदा रहना चाहती हो तो निकल चलो यहां से। अपने घर उसने जाने से मना कर दिया। तभी चाचा कमलेश भी उठ गया था तो क्या करते, माचिस डालकर भग लिए। रिश्तेदार ने पूछा, किसी ने पीछा नहीं किया। मुकेश ने जवाब दिया, अगर कोई पीछा करता तो गोली भी खाता। सब हल्के में ले रहे थे। क्या होना है ज्यादा से ज्यादा जेल ही तो होगी।

सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई घटना

हीरालाल के घर की गली के बाहर अमन कुमार घर में कारखाना चलाते हैं। छज्जे पर दो सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। एक कैमरा हीरालाल के घर की ओर, दूसरा सड़क की ओर लगा है। सीसीटीवी फुटेज में शुक्रवार सुबह 4.10 बजे मुकेश झोले में पेट्रोल का जरीकेन लेकर जाते हुए कैद हुआ। सुबह करीब 4.15 बजे मुकेश वहां से बाहर की ओर भागता कैद हुआ है। पुलिस ने कुछ दूर मसाला फैक्ट्री के भी सीसीटीवी फुटेज खंगाले हैं।

एक कोठरी के कमरे में ही रहता था परिवार

कोठरी जैसे कमरे में ही हीरालाल का परिवार रहता था। कमरे में एक ओर रसोई थी, दूसरी तरह गृहस्थी का सामान रखा था। डेढ़ माह का मनीषा का बेटा खटोले पर लेटा था। परिवार के अन्य सदस्य जमीन पर बिस्तर लगाए सोए हुए थे। हीरालाल ने बताया कि पेट्रोल डालने पर बिस्तर गीले हुए थे। नींद में समझ में आया कि शायद बारिश हो रही है, पानी अंदर आ गया है। पेट्रोल की महक आने पर जब तक संभलते और उतनी देर में आग की लपटों से घिर गए।

सिलिंडर फटता तो होता बड़ा हादसा

हीरालाल की कोठरी तक पहुंचने के लिए बहुत संकरा रास्ता है। संकरी गली में तीनों ओर एक दूसरे से जुड़े मकान बने हैं। वो तो अच्छा था कि शोर शराबा सुनकर लोग तुरंत ही मौके पर पहुंच गए और समय रहते सिलिंडर का रेगुलेटर खोलकर उसे अलग कर दिया। अगर सिलिंडर फटता तो बड़ा हादसा होता।

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