महोबा, जेएनएन। उपजिलाधिकारी कुलपहाड़ के अर्दली 59 वर्षीय इलाहीबख्श ने तहसील प्रांगण में सीढ़ी की ग्रिल में रस्सी का फंदा डालकर फांसी लगा ली। जेब से सुसाइड नोट बरामद हुआ है जिसकी लिखावट साफ नहीं है लेकिन, उसमेंं एसडीएम का जिक्र करते हुए खुद को चोर कहे जाने और घूस लेने के आरोप लगाए जाने पर फांसी लगाने की बात लिखी है। परिजन ने सीधे तौर पर एसडीएम पर आरोप लगा कार्रवाई की मांग की। परिजन के साथ ही घटना से उत्तेजित लोगों ने झांसी-मीरजापुर राजमार्ग पर एक घंटे जाम लगाकर हंगामा किया। मृतक के भाई अधिवक्ता इदरीश ने तहरीर देते हुए एसडीएम पर हत्या कर शव को फांसी पर लटका कर आत्महत्या का रूप देने का आरोप लगाया है। 


कुलपहाड़ एसडीएम देवेंद्र  सिंह के अर्दली सतियनपुरा निवासी इलाहीबख्श शुक्रवार रात घर नहीं पहुंचे। परिवारीजन फोन मिलाते रहे लेकिन, संपर्क नहीं हो सका। परिवारीजन ने एसडीएम के साथ उनके कहीं जाने की बात सोचकर तलाश नहीं की। शनिवार सुबह तहसील में झाड़ू लगाने पहुंचे सफाई कर्मी ओमप्रकाश ने सीढ़ी के नीचे इलाहीबख्श का शव लटकता देखा तो सीओ को सूचना दी और परिवारीजन को भी फोन कर जानकारी दी। वहां परिवारीजन पहुंचे और एसडीएम पर आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। कार्रवाई की मांग और जिलाधिकारी को बुलाने की बात कहते हुए राजमार्ग पर जाम लगा दिया। एडीएम पूनम निगम और एएसपी वीरेंद्र कुमार ने लोगों को समझाकर शांत किया। जिलाधिकारी सहदेव और कप्तान स्वामीनाथ भी मौके पर पहुंचे। इसके बाद किसी तरह पुलिस शव को कब्जे में ले सकी। 
क्या बोले पुलिस कप्तान
मृतक के परिजन की तहरीर पर जांच कर कार्रवाई की जाएगी। सुसाइड नोट स्पष्ट पढऩे में नहीं आ रहा है। इसकी जांच कराई जाएगी। इलाहीबख्श के नजदीकियों से हैंडराइटिंग की पुष्टि कराने का प्रयास होगा। परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज की भी जांच कराई जा रही है। 
-स्वामीनाथ, एसपी 


एसडीएम पर हत्या का आरोप लगा बाद में मुकरा भाई
कुलपहाड़ तहसील के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी व एसडीएम की अर्दली ड्यूटी पर तैनात इलाहीबख्श का सीढिय़ों से लटकता शव मिलने पर छोटे भाई अधिवक्ता इदरीश ने एसडीएम पर सीधे तौर पर हत्या का आरोप लगाया। बाद में इदरीश ने ही तहरीर बदलते हुए बिना किसी पर आरोप लगाए घटना को संदिग्ध मान जांच की मांग की। इदरीश ने तहरीर देते हुए कहा कि प्रार्थी के बड़े भाई इलाहीबख्श पुत्र रमजान खां को शुक्रवार शाम एसडीएम देवेंद्र सिंह ने अपने विश्राम कक्ष में बुला कर प्रताडि़त किया।
इदरीश ने आरोप लगाय है कि भाई का शरीर देख कर लग रहा है कि विश्राम कक्ष में हत्या करके घसीटते हुए आत्महत्या का स्वरूप देने के लिए तहसील भवन की गैलरी में जीने के पास लटका दिया गया। मृतक का मोबाइल विश्राम कक्ष में पड़ा है और चप्पलें विश्राम कक्ष के बाहर हैं। तहरीर में एसडीएम के विरुद्ध हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर जांच की मांग की गई है। बाद में पुलिस को एक और तहरीर दी गई जिसमें इलाहीबख्श को अक्सर देर होने पर एसडीएम के यहां रुकना बताते हुए बिना किसी पर आरोप लगाए मौत को संदिग्ध मान जांच की मांग की गई। तहरीर बदले जाने से मामले की गंभीरता और भी बढ़ गई। 


सुसाइड नोट को लेकर रही ऊहापोह 
घटना जानकारी होते ही तत्काल मौके पर पहुंचे सीओ कुलपहाड़ अवध  सिंह ने मृतक की जेब से सुसाइड नोट बरामद कर अपने कब्जे में ले लिया। जानकारी होने पर पहुंचे परिजनों और अधिवक्ताओं ने सुसाइड नोट वापस मांगा तो काफी देर तक पुलिस से बहस होती रही। अंत में हंगामा बढ़ते देख सीओ ने परिवाजनों को सुसाइड नोट सौंपा तब मामला नियंत्रित हुआ। सुसाइड नोट की भाषा स्पष्ट न होने से काफी कुछ समझ में नहीं आ रहा है पर उपजिलाधिकारी स्पष्ट तौर पर लिखा गया है। 


जाम से हलकान रहे राहगीर
अर्दली इलाहीबख्श का लटकता शव मिलने की खबर इलाके में तेजी से आग की तरफ फैल गई। परिवारीजनों ने एसडीएम पर हत्या और कार्रवाई की मांग कर झांसी मिर्जापुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर जाम लगा दिया। सड़क पर बैंच आदि डाल कर रोड जाम होने से लगभग एक घंटे तक यातायात पूरी तरह बाधित रहा। बसो व अन्य सवारियों तथा निजी वाहनों से यात्रा कर रहे लोग जाम में फंस कर बुरी तरह हलकान रहे। लगभग एक घंटे की मशक्कत के बाद अधिकारियों ने जाम खुलवाया तब यातायात सामान्य हो सका। 
एसडीएम ने उत्पीडऩ को पूरी तरह नकारा 
घटना के बाद एसडीएम कुलपहाड़ देवेंद्र सिंह ने उत्पीडऩ बात का पूरी तरह खंडन करते हुए कहा कि सभी आरोप पूरी तरह निराधार हैं। कुछ दिनों से इलाहीबख्श परेशन नजर आ रहे थे। सेवा निवृत्ति नजदीक होने से वे परेशान दिखते थे।  एसडीएम कुलपहाड़ देवेंद्र सिंह ने जागरण को फोन पर बताया कि उनके ऊपर लगाए जा रहे आरोप पूर तरह निराधार हैं। यदि ऐसा था तो जनपद या मंडल में उनसे भी बड़े अधिकारी थे जहां शिकायत की जा सकती थी। इसके पूर्व ऐसी कोई चर्चा तक नहीं हुई।
इलाहीबख्श की दो माह बाद सेवानिवृत्ति होनी थी। इसे लेकर वे कुछ परेशान जरूर नजर आते थे पर कभी किसी तरह की चर्चा या जानकारी नहीं दी। उनकी इलाहीबख्श से कोई नाराजगी भी नहीं थी। सामान्य व्यवहार में कर्मचारियों को जैसे अनुशासित रखा जाता है उसमें यदि कोई बात बुरी लगी हो कह नहीं सकता हूं। जानबूझ कर किसी कर्मचारी कभी कुछ नहीं कहा है। 

लोकसभा चुनाव और क्रिकेट से संबंधित अपडेट पाने के लिए डाउनलोड करें जागरण एप

Posted By: Abhishek