कानपुर, जेएनएन। Chamoli Tragedy  उत्तराखंड के चमोली जिले में ऋषिगंगा नदी पर पावर प्रोजेक्ट के बांध का एक हिस्सा टूटने के बाद अलकनंदा नदी में प्रवाह बढ़ गया है। इसकी सूचना पर उत्तर प्रदेश में गंगा नदी के किनारे पर बसे गांव तथा शहरों में हाईअलर्ट घोषित किया गया है। गंगा नदी के किनारे वाले जिलों बिजनौर, बदायूं के साथ ही हापुड़, फर्रुखाबाद, कानपुर, प्रयागराज व वाराणसी के जिलाधिकारियों से राहत आयुक्त ने सम्पर्क करने के साथ ही मुस्तैद रहने का दिशा-निर्देश जारी कर दिया है। चमोली की इस घटना के बाद उत्तराखंड के बीच ऋषिकेश व हरिद्वार सहित मैदानी इलाकों में अलर्ट जारी कर दिया गया है। अब तक प्रयागराज के माघ मेले को लेकर भी प्रशासन और विभाग काफी सतर्क है। बता दें कि इस आपदा के बाद सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिशा निर्देश जारी कर दिए हैं। कानपुर के आसपास के इलाकों की बात करें तो गंगा से सटे हुए क्षेत्र फर्रुखाबाद, कन्नौज, उन्नाव और फतेहपुर में सिंचाई विभाग अलर्ट मोड पर है। 

कानपुर - 

कानपुर सिंचाई विभाग ने ग्लेशियर के टूटने से गंगा में बाढ़ को देखते हुए सतर्कता बढ़ा दी है। इसको लेकर डीएम ने सोमवार को बैठक बुलाई है गंगा के किनारे गांव में लोगों को अलर्ट कर दिया है। एक लाख क्यूसिकपानी आने की संभावना है। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता जेपी सिंह ने बताया की नजर रखी जा रही है। शाम को पता चलेगा कि कितना पानी आ रहा है। बताया गया है कि कानपुर के बैराज तक पानी आने में कम से कम आठ दिन का समय लगेगा। 

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फर्रुखाबाद - 

सिंचाई विभाग की ओर से  जनपदों को अलर्ट जारी कर दिया गया है। हालांकि अभी तक इसकी भनक जनपद में गंगा किनारे पांचाल घाट पर लगी रामनगरिया में जुटे श्रद्धालु को नहीं लगी है। दोपहर तक गंगा तटों पर श्रद्धालुओं और स्नानार्थियों की भीड़ लगी हुई है। उप जिलाधिकारी सदर अनिल कुमार ने बताया कि सिंचाई विभाग का अलर्ट मिल गया है। प्रशासन ने अपने संसाधन जुटाना शुरू कर दिया है। हरिद्वार से फर्रुखाबाद तक पानी पहुंचने में कम से कम 48 घंटे का समय लगेगा। इतनी समय में आवश्यक कदम उठा लिए जाएंगे। फिलहाल स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

कन्नौज - 

उत्तराखंड में जोशीमठ डैम टूट जाने के बाद गंगा और अलकनंदा नदी में बाढ़ आने की संभावना है। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता पारसनाथ मौर्य ने बताया आपदा राहत एवं बाढ़ नियंत्रण मुख्यालय से जिले में अलर्ट जारी किया गया है। विभाग के सभी कर्मचारियों की जिला न छोड़ने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही तटवर्ती गांवों में भी लोगों से सतर्क रहने को कहा गया है। गंगा के पानी को नहरों में डायवर्ट किया जा रहा है।

उन्नाव -

गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी की आशंका को लेकर परियर, बक्सर, बांगरमऊ, फतेहपुर चौरासी, गंगाघाट के 34 ग्राम पंचायतों में चौकसी बढ़ी दी गई है। एनाउंस कराकर लोगों को सतर्क किया जा रहा है। डीएम रवींद्र कुमार ने आपात बैठक कर सभी एसडीएम को दिशा-निर्देश दिए हैं। साथ ही एडीएम राकेश सिंह को गंगा से सटे गांवों की स्वयं निरीक्षण करने का निरीक्षण दिया है। वहीं जरूरत पड़ने पर लोगों को मकान खाली कराने को भी कहा है। आपातकाल के लिए एनडीआरएफ, सीडीआरएफ और फ्लड पीएसी की भी मदद लेने की तैयारी कर ली गई है। गंगाघाट में नगर पालिका और पुलिस द्वारा गंगा किनारे स्थित मिश्रा काॅलोनी, चंपापुरवा, गोताखोर, मनभउना, नेतुवा ग्राम पंचायत से जुड़े अधिकतर गांवों में एनाउंस कराकर लोगों को सतर्क किया जा रहा है। उधर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रदीप कुमार पांडेय प्रशासन के आदेशानुसार गंगा तीरे संचालित होने वाले परिषदीय स्कूलों को लेकर सभी खंड शिक्षाधिकारियों को सतर्क किया है। हालांकि रविवार को जिले के गंगाघाट, नानामऊ घाट, परियर, बक्सर घाटों पर गंगा का स्तर बहुत नीचे बना हुआ है वहीं लोग आराम से स्नान करते नजर आए।

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फतेहपुर -

उत्तराखंड के चमोली से लेकर उत्तर प्रदेश में हरिद्वार तक रेड अलर्ट जारी किया गया है। इसी क्रम में  एडीएम लालता प्रसाद ने राजस्व कर्मियों को गंगा, यमुना नदियों के किनारे बसे गांवों में जाकर स्थितियों का जायजा लेने के निर्देश दिए हैं। एसडीएम ने बताया कि सैकड़ों किमी दूर तक आपदा का प्रभाव दिखाई पड़ सकता है। हमारे यहां नदियों से दूर आबादी होने की वजह से खतरा बहुत अधिक नहीं है। इसके बावजूद राजस्व कर्मियों, ग्राम पंचायत अधिकारियों तथा खंड विकास अधिकारियों को स्थिति पर बराबर नजर रखने के निर्देश दिए हैं। इलाकाई पुलिस को भी नदियों में नौका संचालन पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।

 

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