कानपुर, जेएनएन। हैलट अस्पताल में एक डॉक्टर के पुत्र को कोरोना का संदिग्ध मरीज समझकर उसका उपचार न करने और उसकी मौत के मामले में विपक्षी नेताओं ने सरकार को घेरा है। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने ट्वीट कर चिकित्सा व्यवस्था पर तंज कसा है। साथ ही अस्पतालों में कोरोना महामारी से निपटने के आधे-अधूरे इंतजाम पर सवाल खड़े किए हैं। दोनों नेताओं के ट्वीट के जवाब में जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य बचाव में उतर आईं हैं।

अखिलेश ने ट्विट में कही ये बात

पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने ट्विट में लिखा है कि-ये दुखद है कि कानपुर के एक डॉक्टर को एंबुलेंस की अनुपलब्धता और हैलेट हॉस्पिटल में स्ट्रेचर व अन्य चिकित्सीय सहायता के अभाव में अपना बेटा खोना पड़ा। सरकार व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण देकर ये सुनिश्चित करे कि कोरोना की आशंका के डर से मेडिकल स्टाफ़ किसी भी मरीज़ की उपेक्षा न करे।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष का ट्विट

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा है कि कानपुर के हैलट अस्पताल गेट पर डाक्टर पिता के जद्दोजहद के बाद ICU पहुंचे बेटे ने दम तोड़ दिया। आज हम महामारी के दौर में हैं,स्वास्थ्य सेवाओं का यह हाल व्यवस्था पर सवालिया निशान हैं। सरकार सुरक्षा किट देकर स्वास्थ्य कर्मियों के डर को समाप्त करें जिससे अन्य मरीजों की उपेक्षा ना हो।

बचाव में उतरीं मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य

अखिलेश के ट्विट के बाद प्राचार्य का बयान आया है। उन्होंने वीडियो जारी करके कहा है कि मरीज कोरोना का नहीं था, गलती से वहां चला गया था। वहां प्रवेश निषेध है इसलिए वहां उसे कोई नहीं मिला। उसे इमरजेंसी जाना चाहिए था, वहां एक कोरोना वार्ड का वार्ड ब्वॉय था, उसने मरीज को संक्रमण न होने पाए इसलिए हाथ नहीं लगाया। इमरजेंसी पहुंचने पर मरीज को तुरंत अटेंड किया गया।

Posted By: Abhishek

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