कानपुर, जेएनएन। बुंदेलखंड वासियों को 135 वर्ष बाद रेलवे लाइन के दोहरीकरण की सौगात मिली है। संभावना है कि दोहरीकरण का कार्य पूर्ण होने के बाद कुछ नई यात्री ट्रेनों का आवागमन भी बढ़ेगा।

बांदा कानपुर रेलखंड का निर्माण अंग्रेजी शासनकाल के दौरान 1885 में कराया गया था। उस समय इस रूट पर मालगाड़ी से सामान पहुंचाना शुरू किया गया। कुछ वर्षों के बाद एक पैसेंजर ट्रेन सुबह-शाम चलाई गई। आजादी के आंदोलन के दौरान क्रांतिकारियों ने 1942 में इस रेलवे लाइन को उखाड़ दिया था।

देश आजाद होने के बाद इसका कार्य पुन: 1947 में शुरू कराया गया और कुछ पुराने स्टेशनों को हटाकर नए स्टेशन बना नई लाइन तैयार की गई। तब यह सिंगल लाइन ही बनी हुई थी।

मालगाड़ियों के साथ यात्री ट्रेनों को बढ़ा देने तथा रेलवे लाइन सिंगल होने से यातायात प्रभावित हो रहा था। वहीं बुंदेलखंड वासी अर्से से बांदा कानपुर रेल खंड के दोहरीकरण की मांग कर रहे थे। इसके लिए कई बार व्यापारिक एवं राजनीतिक दलों ने रेलवे को ज्ञापन आदि भी सौंपे गए।

सुविधा के साथ समय की होगी बचत

गत सितंबर से भीमसेन के साथ खैरार जंक्शन से दोहरीकरण के लिए जमीन समतलीकरण के साथ यमुना नदी में पुल निर्माण का कार्य शुरू कराया गया है। जल्द ही भीमसेन जंक्शन से लेकर खैरार जंक्शन तक रेलवे लाइन बिछाने का कार्य शुरू होगा।

इससे लखनऊ, दिल्ली, कानपुर, हरिद्वार, जबलपुर, सतना, इलाहाबाद आदि जगहों पर जाने में सुविधा होगी और समय की भी बचत होगी। स्टेशन मास्टर एस के शुक्ला ने बताया कि विद्युतीकरण के बाद रेलवे ने इस खंड के दोहरीकरण का कार्य तेजी से शुरू कराया है। दोहरीकरण का कार्य पूर्ण होने से लोगों को आवागमन मे सुविधा होगी और ट्रेनों की लेटलतीफी से मुक्ति मिलेगी।

इनका है कहना

रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने बताया कि संभावना है कि दोहरीकरण के बाद कानपुर एवं मानिकपुर के मध्य अथवा लखनऊ जबलपुर के मध्य कुछ यात्री ट्रेनों को बढ़ाया जा सकता है। अगर ऐसा हुआ तो इस पिछड़े क्षेत्र में विकास का मार्ग प्रशस्त होगा और लोगों को आवागमन में सुविधा मिलेगी। 

Edited By: Rahul Mishra