कानपुर, जेएनएन। सरसों के तेल में किसी भी अन्य तेल की ब्लेंडिंग रोके जाने के डेढ़ माह बाद अब प्रदेश में इसकी नियमित जांच होगी। जिलों में होने वाली जांच की सूचना भी रोज शासन स्तर पर भेजी जाएगी। तेल के नमूने में मिलावट मिलने पर कारोबारियों पर कार्रवाई भी होगी। वहीं, दाल में मिलावट पर भी पैनी निगाह रखी जाएगी। इससे जनता की सेहत के साथ खिलवाड़ करने वालों पर शिकंजा कसा जाएगा।

भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने राष्ट्रीय स्तर पर सरसों के तेल में होने वाली किसी भी तरह की ब्लेंडिंग को आठ जून 2021 से प्रतिबंधित कर दिया था। इससे पहले लाभ कमाने के लिए सरसों के तेल में मिलावट हो रही थी। इसमें पामोलीन, पाम आयल, राइस ब्रान आदि तेलों को मिलाया जाता था, जिससे तेल अखाद्य न बताया जा सके और सस्ते तेल को सरसों के तेल में मिलाकर लाभ भी बढ़ाया जा सके। आठ जून से यह व्यवस्था लागू है कि अगर किसी बोतल, पाउच या टिन पर सरसों का तेल लिखा गया है तो उसमें किसी तरह की कोई ब्लेंडिंग नहीं होनी चाहिए। सिर्फ सरसों का तेल होना चाहिए। हालांकि, विभाग को इस बीच सूचना मिली है कि बहुत से लोग अब भी सरसों के तेल में मिलावट कर रहे हैं। इन शिकायतों के बढऩे की वजह से प्रदेश की खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन आयुक्त अनीता सिंह ने सभी जिलों में अभिहित अधिकारियों को रोज सरसों के तेल में मिलावट की जांच के आदेश दिए हैं। उधर, दालों में मिलावट की जांच के लिए भी कहा गया है। इसकी भी रिपोर्ट रोज भेजनी है कि कितने स्थानों पर जांच की गई और वहां क्या गड़बड़ी मिली। कानपुर के जिला अभिहित अधिकारी विजय प्रताप सिंह ने बताया कि विभाग के 27 खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को जांच के आदेश दे दिए गए हैं। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को प्रतिदिन की रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया है।  

Edited By: Akash Dwivedi