कानपुर, जागरण संवाददाता।  सड़क सुरक्षा के नाम पर आयोजित किए जाने वाले जागरूकता कार्यक्रम महज दिखावा साबित हो रहे हैं। स्कूल कॉलेजों में सेमिनार आयोजित कर सुरक्षित यातायात का पाठ तो पढ़ाया जाता है लेकिन न तो लोग इससे कुछ सीखते हैं और न ही जिम्मेदार नियमों का पालन कराने के लिए तत्पर दिखाई देते हैं। आंकड़े बताते हैं कि इस साल अब तक 665 लोग सड़क पर अपनी जिंदगी गंवा चुके हैं। उल्टी दिशा, तेज रफ्तार और यातायात नियमों की अनदेखी इसका सबसे बड़ा कारण है। 
एक जनवरी से 15 दिसंबर तक के यह आंकड़े गुरुवार को ट्रैफिक पुलिस ने जारी किए। बेतरतीब यातायात से जूझ रहे शहर में जितने लापरवाह विभागों के जिम्मेदार हैं। उससे कहीं ज्यादा वाहन सवार हैं। खुली सड़कें देखकर बाइक सवार 80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ रहे हैं। चंद मीटर घूमकर आने की बजाए उल्टी दिशा से ही वाहन लेकर चल देते हैं। गुरुवार को भी सड़कों पर यही नजारा दिखाई दिया। हैरानी की बात तो ये है कि इनमें सबसे ज्यादा स्कूली वैन, स्कूटी से आ रहे स्कूली बच्चे और अन्य युवा शामिल थे। 
जीटी रोड पर लगातार हो रहे हादसे
जीटी रोड पर गुरुदेव चौराहे के आगे तोड़कर बना दिए गए कट पर इस साल हुए सात हादसों में अब तक दो लोगों की मौत हो चुकी है, लेकिन लापरवाही अब तक जारी है। यही नहीं कल्याणपुर थाने के सामने से उल्टी दिशा से वाहन बगिया क्रॉसिंग की ओर आते नजर आए, जबकि कुछ माह पूर्व पुलिस ने सख्ती कर रांग साइड ड्राइविंग पर रोक लगा दी थी। यही नहीं कैंट में शिवनारायण टंडन सेतु, मेडिकल कालेज पुल पर ऐसे ही तेज रफ्तार वाहन आते दिख जाते हैं। 
ये हादसे और मौत
1480 हादसे हुए इस साल 15 दिसंबर तक
665 लोगों की जान गई इन हादसों में
1163 लोग घायल हुए इन दुर्घटनाओं में
कारण और उससे होने वाले हादसे
270 हादसे हुए उल्टी दिशा में आने के कारण 
455 वाहन तेज रफ्तार के हुए शिकार
133 वाहन चालक के नशे में होने के कारण भिड़े
622 हादसे अन्य कारणों से हुए 

आज़ादी की 72वीं वर्षगाँठ पर भेजें देश भक्ति से जुड़ी कविता, शायरी, कहानी और जीतें फोन, डाउनलोड करें जागरण एप