कानपुर, जेएनएन। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर वाहनों की तेज रफ्तार और चालकों की नींद की झपकी हादसों की वजह बन रही है। पिछले वर्ष एक दर्जन हादसे इसकी गवाही दे रहे हैं, वहीं बीते चार माह के अंदर बड़े हादसों में तीस लोगों की जान जा चुकी है। तेज रफ्तार होने के कारण चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख पा रहे और अपनी व दूसरों की जान के लिए खतरा बन रहे हैं।

प्रमुख हादसे जिन्होंने झकझोरा

  • 14 अक्टूबर 2019 को आगरा के फतेहाबाद में गांव बाबरपुर के पास तेज रफ्तार इनोवा की अज्ञात वाहन से टक्कर हो गई थी। हादसे में चार लोगों की मौके पर मौत हो गई थी और पांच लोग घायल हो गए थे। इनोवा सवार दिल्ली से इटावा के नाय का पुरा गांव के थे। 
  • 02 नवंबर 2019 को आगरा के फतेहाबाद के पास तेज रफ्तार विटारा ब्रेजा कार आगे चल रहे ट्रक में पीछे से घुस गई थी। हादसे में कार सवार दिल्ली से इटावा जा रहे परिवार की महिला, उनके दो बेटों और बहन की मौत हो गई थी।
  • 12 फरवरी 2020 को एक्सप्रेस वे पर दिल्ली से बिहार के मोतिहारी जा रही प्राइवेट बस भी फिरोजाबाद जिले के नगला खंगर के पास दुर्घटनाग्रस्त हुई थी। इसमें 14 लोगों की मौत हुई थी। 35 लोग घायल हुए थे।
  • 17 फरवरी 2020 को बिल्हौर के पास एक्सप्रेस वे पर बस से फॉच्र्यूनर कार टकराने से छह लोगों की जान चली गई।

Posted By: Abhishek

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