कानपुर, जेएनएन। काकादेव निवासी ऊषा देवी किराए के मकान में रहती हैं। पति के देहांत के बाद उन्होंने पारिवारिक लाभ योजना के लिए अनुदान का फार्म भरा। लेखपाल ने उन्हें पात्र बताया और योजना का लाभ उन्हें मिल भी गया, लेकिन जब डीएम ने दोबारा जांच के लिए अधिकारी नामित किए तो जांच अधिकारी ने उन्हें अपात्र बता दिया। साथ ही रिपोर्ट में बच्चों का सरकारी नौकरी में होना अपात्रता का कारण बताया। अब एसडीएम ने जांच कराई तो पता चला कि आवेदिका के बच्चे सरकारी नौकरी में नहीं बल्कि मजदूरी करते हैं। सिर्फ ऊषा देवी ही नहीं अब तक ऐसे 78 मामले सामने आए हैं।

Case-1 : कौशलपुरी निवासी प्रिया के पति की मौत हो गई थी। प्रिया ने योजना का लाभ लिया था। अब दोबारा जांच में प्रिया को यह कहते हुए अपात्र बता दिया कि उसके पास संपत्ति अधिक है। एसडीएम की जांच में पता चला कि प्रिया के पास कोई संपत्ति नहीं है।

Case-2 : ई-डब्ल्यूएस बर्रा निवासी ङ्क्षपकी को पति की मृत्यु पर पारिवारिक लाभ योजना के तहत 30 हजार रुपये की आर्थिक मदद मिली थी। जांच अधिकारी ने रिपोर्ट में मृतक की उम्र 60 साल से अधिक दर्शाकर अपात्र बता दिया जबकि जांच में मृतक की उम्र आवेदन तिथि के समय 28 वर्ष आठ माह मिली।

Case-3 : दलेलपुरवा की अंजुमआरा के पति की मृत्यु होने पर उन्हें 30 हजार रुपये मिले थे। अंजुम को भी जांच अधिकारी ने अपात्र माना है। कहा है कि मृतक की उम्र 63 साल थी, जबकि आधार कार्ड के हिसाब से उम्र 54 साल है।

शादी अनुदान और पारिवारिक लाभ योजना के कुछ लाभार्थियों के अपात्र मिलने के बाद डीएम ने एडीएम आपूर्ति की अध्यक्षता में एक तीन सदस्यीय कमेटी गठित की थी। कमेटी ने 51 अधिकारियों को नामित किया और उन्हें जांच के लिए फार्म दिए। जांच टीम ने 409 लोगों को अपात्र माना। साथ ही 18 सौ से अधिक लोगों का पता गलत बताया। अपात्रता के मामले में ही चार लेखपालों को पहले और 19 लेखपालों को बाद में निलंबित किया गया। समाज कल्याण अधिकारी और तहसील में तैनात एक लिपिक को भी निलंबित किया गया।

दो अल्पसंख्यक कल्याण व दो पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारियों व एक तहसीलदार और दो नायब तहसीलदारों के विरुद्ध कार्रवाई की संस्तुति हुई। लेखपालों ने दोबारा जांच की मांग की तो 45 अधिकारियों को जांच के लिए तैनात किया है। हालांकि एसडीएम ने अपने स्तर से 78 अपात्रों की जांच की तो सभी पात्र मिले। ऐसे में अब यह आशंका है कि मौके पर गए बिना ही जांच अधिकारियों ने पात्रों को अपात्र बना दिया। वहीं लेखपाल अब मांग कर रहे हैं कि गलत जांच करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई हो।

लेखपालों को नहीं दी जांच रिपोर्ट

लेखपाल चाहते हैं कि उन्हें जांच रिपोर्ट उपलब्ध करा दी जाए ताकि वे खुद को सही साबित कर सकें, लेकिन अभी तक जांच रिपोर्ट उन्हें नहीं दी गई है। यही वजह है कि लेखपाल धरना दे रहे हैं और खुद को बहाल करने की मांग कर रहे हैं।

जांच अधिकारियों ने खूब किया खेल : सरसौल ब्लाक के खंड शिक्षा अधिकारी ने पारिवारिक लाभ योजना की जांच में बड़ी गड़बड़ी की है। उन्होंने तो पारिवारिक लाभ योजना के लाभार्थियों को शादी अनुदान का लाभार्थी मानते हुए जांच की और सभी को अपात्र बता दिया। परिणाम स्वरूप उनकी रिपोर्ट के आधार पर लेखपालों का निलंबन हो गया।

मुकदमा दर्ज कराएंगे लेखपाल : जांच अधिकारियों की गड़बड़ी की वजह से निलंबित हुए लेखपालों में से पांच को बहाल कर दिया गया है। उनके एक- एक लाभार्थियों को अपात्र माना गया था। अब लेखपाल संघ जांच अधिकारियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी कर रहा है। लेखपाल मानहानि का नोटिस भी जांच अधिकारियों को दे सकते हैं।

जांच अधिकारियों का प्रशिक्षण : डीएम के आदेश पर जिन 45 अधिकारियों को शादी अनुदान और पारिवारिक लाभ योजना की दोबारा जांच के लिए लगाया गया है उन्हें प्रशिक्षण दिया जाएगा। विकास भवन में उन्हें दोनों योजनाओं की पात्रता और अपात्रता के बारे में बताया जाएगा। उन्हें पीडी डीआरडीए आरके चौधरी प्रशिक्षण देंगे।

-जांच में जो अपात्र मिलें हैं एसडीएम द्वारा कराई गई जांच में पुन: उनके पात्र होने की बात सामने आई इसकी जानकारी मिली है। इसीलिए दोबारा जांच कराने के लिए जांच अधिकारी नामित करने का आदेश दिया है। अगर जांच गलत हुई है तो जो दोषी होंगे उन पर कार्रवाई होगी। -आलोक तिवारी, डीएम

Edited By: Abhishek Agnihotri