कानपुर, जेएनएन। कोरोना संक्रमण कम होने के बाद शादियों को लेकर तैयारियां भी होने लगी हैं। शादियों में फिजूलखर्ची रुके,दहेज की मांग न हो इसको लेकर अभियान भी शुरु करने की तैयारी कर ली गई है। जल्द ही लोगों को जागरूक किया जाएगा। शादियों में फिजूलखर्ची को रोकने के लिए मस्जिदों के इमामों का सहारा भी लिया जाएगा। इसके लिए लोगों को जागरूक करने की पूरी कार्य योजना तैयार भी हो गई। बस अंतिम मोहर लगनी बाकी है।

शादियों में फिजूलखर्ची रोक ने तथा निकाह को आसान बनाने के लिए ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड ने अभियान शुरु किया था। इंटरनेट मीडिया से भी इसका प्रचार-प्रसार किया गया था। बोर्ड के अभियान में कई बिंदु शामिल थे। शादियों में फिजूलखर्ची रोकने, निकाह को आसान बनाने, निकाह में खाने का इंतजाम न करने, शादियों में बैंड बाजा व आतिशबाजी न करने आदि के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा था। इस बीच कोरोना संक्रमण फैलने लगा। रमजान भी शुरु हो गए। कोरोना कफ्र्यू लगने से ईद के बाद शादियां भी बहुत कम हो सकी। कोरोना कफ्र्यू में ढील मिलने व कोरोना संक्रमण में कमी आने से अब शादियों की तैयारियां शुरु हो चुकी है हालांकि बड़ी संख्या में शादियों अक्टूबर नवंबर तक बढ़ा दिया गया है। शादियों में फिजूलखर्ची न हो इसको लेकर एक बार फिर अभियान चलाने की तैयारी हो रही है। उधर आल इंडिया गरीब नवाज काउंसिल भी जलसे कर लोगों को शादियों में फिजूलखर्ची न करने के लिए जागरूक कर रही है। वहीं सुन्नी उलमा काउंसिल भी आल इंडिया महिला बोर्ड के साथ मिलकर अभियान चलाएगी। महिलाएं घर-घर जाकर लोगों को समझाएंगी। 

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