जागरण संवाददाता, कानपुर : कोरोना संक्रमण की पॉजिटिव रिपोर्ट आते ही लोग अंदर से टूट रहे हैं। उन्हें खुद से ज्यादा परिवार वालों की चिता सताती है। किसी तरह के लक्षण नहीं है तो घर में ही इलाज शुरू हो जाता है। अगर कोई समस्या हुई तो स्वयं के साथ ही उनके स्वजन भी चितित हो जाते हैं। इसकी बड़ी वजह बेड, ऑक्सीजन की किल्लत है। इन सबके बावजूद अपनों की जान बचाने की परवाह में घरवाले कभी एक अस्पताल तो कभी दूसरे का चक्कर लगाते हैं। उनमें जीवन की खत्म होती लाइफ लाइन के इलाज की आशा रहती है, पर सिस्टम की लापरवाही और अस्पतालों की अव्यवस्था जिदगी के लिए छटपटाती सांसों का दम घोंट रही है।

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इलाज से पहले महिला ने दम तोड़ा

फतेहपुर के सर्वदमन सिंह स्वजन संग मां शकुंतला को लेकर हैलट इमरजेंसी पहुंचे। यहां उन्हें काफी देर तक स्ट्रेचर नहीं मिल सका। आनन फानन घरवाले बुजुर्ग महिला को लेकर इमरजेंसी के अंदर गए। उनका इलाज होता, उससे पहले ही वृद्धा ने दम तोड़ दिया। स्वजन के मुताबिक उनकी सांस फूल रही थी। फतेहपुर के कई निजी अस्पतालों में दिखाया, लेकिन वहां भर्ती नहीं किया गया। कानपुर के भी अस्पताल में जगह नहीं मिल सकी।

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पिता को लेकर भटका पुलिसकर्मी

कानपुर के ट्रैफिक पुलिस में एचसीपी रामनरेश अपने पिता 70 साल के रोशन लाल को लेकर भटकते रहे। उन्हें बेड और सिलिडर नहीं मिल सका। रोशन लाल पुलिस विभाग से रिटायर्ड हैं। उन्हें सुबह सांस लेने में कठिनाई हुई। बेटा पहले पुलिस लाइन के अस्पताल ले गया। यहां उनकी गंभीर हालत को देखते हुए हैलट रेफर कर दिया गया। रामनरेश पिता को भर्ती कराने के लिए परेशान हुए।

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साहब मेरे बाबू को बचा लो

उन्नाव के करोवन गांव के 68 साल के राम दुलारे की मंगलवार को सांस फूल रही थी। उनका बेटा संजय अन्य भाइयों संग उन्हें लेकर हैलट इमरजेंसी पहुंचा। यहां से स्टाफ ने उन्हें दूसरी जगह जाने के लिए कह दिया। घरवाले मिन्नतें करते रहे, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। छोटा बेटा रोता रहा और कहने लगा की साहब मेरे बाबू को बचा लो, बहुत बीमार हैं। देर हो जाएगी तो कोई फायदा नहीं। आखिर में स्वजन मरीज को लेकर दूसरे अस्पताल के लिए निकल गए।

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भटकते रहे एक से दूसरे अस्पताल

बर्रा के 64 वर्षीय चंद्रप्रकाश सिंह में कोरोना जैसे लक्षण मिले। उन्हें दो तीन दिन से बुखार आ रहा था। घर में अचानक से बेहोश हो गए। बेटा संजय घरवालों के साथ उन्हें बर्रा के नर्सिंगहोम लेकर पहुंचा, लेकिन वहां बेड खाली न होने का हवाला दिया गया। नौबस्ता के नर्सिंगहोम में यही जवाब मिला। कांशीराम कोविड अस्पताल में डॉक्टरों ने हैलट ले जाने के लिए बोल दिया। मंगलवार को हैलट इमरजेंसी में उन्हें भर्ती कर लिया गया।

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मां को गोद में लेकर पहुंचा

फतेहपुर के जहानाबाद की 58 साल की कमला देवी में कोविड पॉजिटिव जैसे लक्षण थे। उनकी सांसें फूल रही थीं। बेटा मुकेश उन्हें गोद में लेकर हैलट इमरजेंसी पहुंचा। उनको देख स्टाफ ने तुरंत स्ट्रेचर मुहैया कराया। मुकेश के गिड़गिड़ाने पर डॉक्टरों ने इलाज शुरू कर दिया। बेटे के मुताबिक मां को तीन दिन से बुखार आ रहा था। फतेहपुर के कई नर्सिंगहोम में दिखाया, लेकिन सभी ने हैलट के लिए भेज दिया।

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पिता की मौत पर रोई बेटी

रामादेवी के 65 वर्षीय रामदुलारे की सांस फूल रही थी। उनका बेटा अविनाश और बेटी रीना उन्हें लेकर हैलट अस्पताल पहुंची। इमरजेंसी में इलाज शुरू होता, उससे पहले ही मरीज की मौत हो गई। अविनाश और रीना पिता के शव से लिपट कर खूब रोए। रीना ने कहा कि नर्सिंगहोम अगर भर्ती कर लेते तो उनके पिता की जान बच जाती। ऑक्सीजन सिलिडर की बात कहकर किसी ने भी इलाज नहीं किया।

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मेरे सामने छोटा भाई चला गया

गुरसहायगंज के चंद्रकिशोर हैलट इमरजेंसी के बाहर रो रहे थे। उन्होंने रोते हुए कहा कि मंगलवार को उनके सामने छोटे भाई ने दम तोड़ दिया। उसे लिवर में परेशानी थी। डॉक्टर को दिखाने के लिए लेकर आए थे, लेकिन समय पर भर्ती नहीं किया जा सका। अब वह घरवालों को क्या जवाब देंगे।

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