कानपुर, जेएनएन। आइआइटी कानपुर के टेक टॉक थ्री कार्यक्रम में युवाओं को पेट के रोगों की जांच और कृषि क्षेत्र के लिए नई तकनीक विकसित करने के लिए आमंत्रित किया गया। कार्यक्रम में उनके आइडिया और किस तरह से काम करना है, इसके सुझाव मांगे गए। बेहतर आइडिया और तकनीक देने पर दो लाख रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाएगा। तकनीक को स्टार्टअप तक ले जाने में सहयोग किया जाएगा।

संस्थान के स्टार्टअप इनोवेशन एंड इंक्यूबेशन सेंटर के सहयोग से आयोजित टेक टॉक थ्री कार्यक्रम के लिए हैदराबाद के नामी पेट रोग विशेषज्ञ डॉ. राकेश कल्पाला और आइआइटी मद्रास के एल्युमिनाई आर माधवन को बुलाया गया। यह कार्यक्रम वर्चुअल हुआ, जिसमें कई संस्थानों के विशेषज्ञ, छात्र-छात्राएं और चिकित्सक भी जुड़े।

डॉ. कल्पाला ने बताया कि गैस्ट्रो की समस्या के लिए इंडोस्कोपी को पूरी तरह से ऑटिफिशियल इंटेलीजेंस पर काम करना होगा ताकि जांच में समस्या की सटीक जानकारी हो सके। पेट में गैस, दर्द, अन्य कारणों जल्द से जल्द पता लग जाए। वहीं, आर. माधवन ने कहा कि ड्रोन का उपयोग खेती और उसके प्रबंधन में किया जा सकता है। कई देश इस पर काम कर रहे हैं। भारत में भी कई तकनीक विकसित हो चुकी है। इसे कैसे और बेहतर बनाया जा सकता है, इस पर काम करने की आवश्यकता है।

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