कानपुर, [राजीव द्विवेदी]। कानपुर शहर में राजीनीतिक हलचल बनी रहती है, इसमें कुछ बातें पर्दे के पीछे सिमट कर रह जाती हैं और लोगों तक नहीं पहुंच पाती हैं। इन्हीं घटनाओं को बाहर लाने के लिए शहरनामा कॉलम है, जो चुटीले अंदाज में आपकों राजनीतिक हलचल से रू-ब-रू कराता है।

योग गुरु भी मौसी के कायल

मौसी के बेबाक दबंग अंदाज से शहर वाकिफ है। चुनौती चाहे जितनी बड़ी हो, वह नहीं हिचकिचातीं। कोरोना की आपदा के दौरान जब लोगों ने अपने को घरों में कैद कर लिया, मगर वह घर नहीं बैठीं। अफसरों ने भी उम्र का हवाला देकर मिलना-मिलाना सीमित रखने को कहा, मगर कहां मानने वाली थीं। शहर साफ रखने के अभियान की अगुवाई में भीड़ से भिड़ता देख नई उम्र के अफसरों में भी जोश आ जाता। हाल ही में टैक्स न चुकाने पर सबसे बड़े शॉपिंग मॉल में ताला जडऩे की कार्रवाई के दौरान मौसी के तेवर टीवी चैनलों पर देश भर ने देखे। योग गुरु रामदेव भी युवाओं को मात देते उनके जोश को देखकर प्रभावित हुए और विशेष संदेश वाहक से उनको हरिद्वार आकर योग सीखने का आमंत्रण भिजवाया। अब भतीजों को पता तो वे मौज ले रहे कि लगता है बाबा मौसी को ब्रांड एंबेसडर बनाना चाहते हैं।

स्वयंभू भावी विधायक

योगी सरकार में ओहदेदार नेताजी के हमसाया और भाजपा संगठन के पदाधिकारी नेताजी की आजकल पार्टी और इंटरनेट मीडिया में खूब चर्चा हो रही है। या यूं कह लीलिए कि मौज ली जा रही है। विधानसभा क्षेत्रों का परिसीमन बदलने से पहले तक ओहदेदार की एक तरह से मिल्कियत रही सीट पर बीते चुनाव में भाजपा को शिकस्त मिली थी। अब जबकि पार्टी ने अगले चुनाव के लिए तैयारी शुरू कर दी है तो ओहदेदार के हमसाया नेताजी भी खास सक्रिय हो गए हैं। ओहदेदार के शहर प्रवास के दौरान आने वाले फरियादियों से मुलाकात के दौरान उनकी गर्मजोशी देख लोगों को उनकी तैयारी का अंदाजा तो था, मगर उनकी बेसब्री का नहीं। दावेदारों में उपयुक्त उम्मीदवार पर पार्टी का फैसला होने से पहले ही नेताजी ने इंटरनेट मीडिया पर खुद को भावी विधायक घोषित कर दिया, उसके बाद से टांग खींचने वाले विधायक जी का संबोधन करने लगे हैं।

और अरमान हुए जवान

आर्यनगर सीट से विधायक रहे सलिल विश्नोई के अब एमएलसी बनने के बाद पार्टी में उनकी जगह लेने को आतुर रहे एक व्यापारी संगठन के नेताओं के अरमान जवान हो गए हैं। विधानसभा क्षेत्र में मैदान खाली हुआ तो उनकी दावेदारी सामने आ गई। संगठन के प्रदेश से लेकर स्थानीय स्तर के पदाधिकारियों ने चुनाव लडऩे की तैयारी भी शुरू कर दी। सबसे खास बात यह है कि एक पदाधिकारी को तो उनके सहयोगी अभी से ही विधायक जी कहने लगे हैं। पदाधिकारी को भी उन्हें इस तरह विधायक कहा जाना अच्छा भी लग रहा है। उनका दावा मजबूत रहे, इसलिए उन्होंने पार्टी के प्रदेश मुखिया से भेंट भी कर ली है और अपनी इच्छा भी जता दी है तो प्रदेश स्तरीय पदाधिकारी ने जिले के पदाधिकारियों को साधना शुरू कर दिया है। वहीं तीसरे नेताजी भी भाजपा के मातृ संगठन से जुड़े नेताओं की परिक्रमा करने में लगे हैं।

खेमे का अध्यक्ष न होने की टीस

कांग्रेस पार्टी ने हाल ही में नगर इकाई को दो हिस्सों में बांटकर दो जिलाध्यक्ष बना दिए हैं। जिलाध्यक्ष के नाम का ऐलान होने से पहले संगठन से मुंह फुलाए बैठे एक नेता जी किसी तरह मान गए और फिर पार्टी में सक्रिय हो गए, मगर एक पूर्व विधायक जी के मन में अब भी टीस है, क्योंकि वह अपने मन का अध्यक्ष नहीं बनवा सके। दरअसल पीड़ा इसलिए भी ज्यादा है कि जिन नेताजी से उनका वर्षों तक पार्टी में वर्चस्व को लेकर पंगा था, वह अरसे तक नेपथ्य में रहने के बाद भी उनके दरबारियों को शहर में संगठन की अगुवाई का जिम्मा मिल गया। पूर्व विधायक जी ने मन की पीड़ा को पार्टी कुछ नेताओं से जाहिर भी की। उन्होंने तसल्ली देकर समझाया कि छोटी छोटी बातों पर परेशान हो आप, अब तो आपको फिर से विधायक और बाद में सांसद बनने की तैयारी शुरू करना है।

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