फतेहपुर, जेएनएन ।  प्रयागराज संगम स्नान के लिये पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को पर्याप्त पानी मिले इसके लिये नदियों में पानी छोड़ा गया है। पानी छोड़े जाने से अचानक यमुना का जलस्तर बढ़ गया जिससे बुंदेलखंड के कई जिलों के लोगों की परेशानी बढ़ गई। बांदा व फतेहपुर को जोडऩे वाला यमुना पर बना पांटून पुल क्षतिग्रस्त हो गया। जिससे बांदा से कानपुर अथवा लखनऊ आने वालों को खासकर मरीजों की ज्यादा परेशानी बढ़ी अब इन्हें करीब पचास किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ रहा है। हमीरपुर में यमुना का जलस्तर बढऩे से कई किसानों की फसल की बारियां खराब हो गईं।  

प्रयागराज संगम स्नान में पर्याप्त पानी की उपलब्धता को देखते हुए प्रमुख नदियों में बीते दिनों बांध से पानी छोड़ा गया था। यमुना नदी का जलस्तर अचानक बढऩे से किशुनपुर कस्बा व दांदो घाट के मध्य बने पांटून पुल के दोनों ओर कच्चा रास्ता बह गया। विभागीय कर्मचारियों ने एक दिन मरम्मत के बाद पुल पर आवागमन शुरू करा दिया। मंगलवार रात जलस्तर और बढ़ गया। मिट्टी कटान के साथ ही दोनों ओर पुल धंस गया। पांटून पुल पर वाहनों की आवाजाही ठप होने से नाव का संचालन शुरू किया गया। पैदल राहगीर, बाजार आने वाले ग्राहक तथा दैनिक कर्मचारियों को नाव पर जोखिम लेकर नदी पार करना पड़ता है। कारोबारियों का कहना था देरी से बने पांटून पुल पर आधी-अधूरी सामग्री लगाई गई है। पर्याप्त सामग्री न होने की वजह से पांटून पुल पर दोनों ओर कच्चा रास्ता बनाना पड़ता है। यमुना नदी में बाढ़ की वजह से अक्सर कच्चा रास्ता बह जाता है। 

जल स्तर घटते ही शुरू होगी मरम्मत

 पांटून पुल पर कच्चा रास्ता क्षतिग्रस्त हो गया है। बीच में एक बार मरम्मत के बाद आवागमन बहाल कराया गया था। लगातार पानी बढऩे की वजह से दोबारा मरम्मत नहीं कराई गई। जल स्तर में गिरावट आते ही मरम्मत कार्य शुरू होगा। - यूसी विश्वकर्मा, जेई लोक निर्माण विभाग 

इधर हमीरपुर में यमुना का जलस्तर 39 सेमी बढऩे से तलहटी में सब्जी उत्पादन करने वाले किसानों की बारियां डूब गईं हैं। जिससे उन्हें खासा नुकसान हुआ है। वहीं केंद्रीय जल आयोग भी बढ़े जलस्तर के कारण से अंजान हैं। बारिश के मौसम केे बाद मुख्यालय से होकर गुजरने वाली दोनों नदियों यमुना व बेतवा का जल स्तर सामान्य चल रहा था। जिसके चलते नदी तट पर सब्जी की खेती करने वाले किसानों ने अपनी बारियां लगा दीं। वहीं बीते दिनों धीरे-धीरे बढ़े जलस्तर से लगाई गई सब्जी की बारियां जलमग्न हो गईं हैं। जिससे किसानों को लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। कुरारा क्षेत्र के किसान इसे लेकर खासा परेशान हैं। उनका मानना है कि बिना मौसम के नदी का जलस्तर बढऩा उनकी समझ के परे है। वहीं केंद्रीय जल आयोग के अनुसार बीते 12 जनवरी को यमुना का जल स्तर 89.07 मीटर था। जिसके बाद शाम छह बजे से जल स्तर का बढऩा शुरू हुआ और बुधवार को 89.46 मीटर पर पहुंच गया। बीते आठ दिनों में नदी का जलस्तर 39 सेमी बढ़ा है। बताया कि जल स्तर बढऩे की उन्हें कोई पूर्व सूचना नहीं मिली है और न ही पानी कहां से आया इसके बारे में कोई पता है। उन्होंने जलस्तर बढऩे को किसी नहर का पानी आने का कारण बताया है। वहीं मुख्यालय में यमुना के दूसरी ओर सब्जी उत्पादन करने वाले किसान परेशान दिखाई दिए। 

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