कानपुर, जेएनएन। गोंडा से रोजी रोटी के लिए शहर आया राजमिस्त्री लॉक डाउन में फंस गया। किराए पर रहने को जगह तो मिल गई, लेकिन परिवार से दूरी बर्दाश्त नहीं हुई। स्वजनों के पास न जा पाने से दुखी होकर उसने खुद को आग लगा ली। पुलिस ने दीवार तोड़कर उसे बाहर निकाला और एलएलआर अस्पताल (हैलट) ले गई, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।

मोबाइल न होने से परिवार वालों से टूट गया था संपर्क

गोंडा के राजापुर गांव निवासी 30 वर्षीय राजमिस्त्री बबलू काम के लिए शहर आया था। डेढ़ साल पहले उसने कुलीबाजार निवासी शिवकुमार का सेन पश्चिम पारा चौकी क्षेत्र के सुंदर नगर में मकान बनाया था। होली के बाद वह काम करने शहर आया और यहां लॉकडाउन में फंस गया। कहीं सिर छिपाने की जगह नहीं मिली तो उसने शिवकुमार से संपर्क किया। उन्होंने उसे सुंदरनगर वाले मकान में किराए पर जगह दे दी। मोबाइल न होने से उसका परिवार से संपर्क टूट गया था। परिवार से दूरी को लेकर वह परेशान था। स्थानीय निवासियों ने बताया कि एक-दो बार फोन पर बात करते-करते वह रोने लगा था।

बुधवार को तनाव में उसने केरोसिन डालकर खुद को आग लगा ली। लोगों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने कमरे और बाहर बनी दुकान के बीच की लॉबी की दीवार को तोड़कर उसे बाहर निकाला। पूछताछ में वह अपना नाम गोंडा जनपद के राजापुर निवासी बबलू बताकर बेहोश हो गया। हैलट अस्पताल में उसकी मौत हो गई। बिधनू थाना प्रभारी पुष्पराज ङ्क्षसह ने बताया कि गोंडा जिले के तीन थानाक्षेत्रों में राजापुर गांव हैं। वह किस थाना क्षेत्र में रहता था इसका अभी पता नहीं चल सका है। तीनों थानों की पुलिस से संपर्क कर उसके घर वालों को सूचना देने का प्रयास कर रहे हैं। 

Posted By: Abhishek

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