जागरण संवाददाता, कानपुर: बोर्ड परीक्षा के दौरान शोर मचाया तो पुलिस कार्रवाई करेगी। डीजीपी ने छात्रों की समस्याओं को देखते हुए 'श्श्श्श, बच्चे पढ़ रहे हैं' अभियान शुरू किया है। इसके तहत ध्वनि प्रदूषण करने वालों पर सख्त कार्रवाई के आदेश हैं।

डीजीपी हितेश चंद्र अवस्थी की ओर से जारी किए गए आदेश में कहा गया है कि तेज आवाज से छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होती है। ऐसे में 15 फरवरी से 31 मार्च तक अभियान चलाकर शोर मचाने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। डीजीपी ने कहा है कि यदि किसी विद्यार्थी को पढ़ाई के दौरान तेज आवाज से परेशानी हो रही हो, तो वह डायल 112 सेवा का लाभ उठा सकता है। फोन पहुंचते ही पुलिस रिस्पांस व्हीकल मौके पर पहुंचेगा और शोर मचाने वाले को चेतावनी देगी। अगर वह नहीं माना तो कानूनी कार्रवाई होगी।

परीक्षा केंद्र से 100 मीटर का क्षेत्र शांत क्षेत्र घोषित

डीजीपी ने अपने आदेश में बोर्ड परीक्षा केंद्र के 100 मीटर एरिया को साइलेंट जोन घोषित किया है। अन्य स्थानों के लिए भी दिन और रात के समय ध्वनि की तीव्रता के मानक तय किए गए हैं। ध्वनि की तीव्रता (डेसीबल में) का मानक

समय औद्योगिक वाणिज्यिक आवासीय शांत

दिन 75 65 55 50

रात 70 55 45 40

नोट: दिन में सुबह छह बजे से रात 10 बजे और रात दस बजे से सुबह छह बजे का है।

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फरवरी मार्च में सर्वाधिक शोर

डीजीपी ने अपने आदेश में वर्ष 2019 में माहवार ध्वनि प्रदूषण के जो आंकड़े जारी किए हैं, उसके मुताबिक सबसे अधिक शोर फरवरी और मार्च महीने में ही होता है। माहवार आंकड़े (डेसीबल में )

जनवरी 1883

फरवरी 2790

मार्च 2445

अपै्रल 1279

मई 910

जून 905

जुलाई 541

अगस्त 754

सितंबर 1121

अक्टूबर 1587

नवंबर 1783

दिसंबर 1240

Posted By: Jagran

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