जागरण संवाददाता, कानपुर : रिटर्न में गलत सूचना देना या फर्जी तरीके से छूट लेने का प्रयास करदाताओं को भारी पड़ सकता है। जांच में साफ हो गया कि टैक्स बचाने के प्रयास में गलत सूचनाएं दी गई हैं। रिटर्न फाइल करने में 10 दिन का समय भी नहीं बचा है। समय कम होने से कई बार गलतियां होती हैं लेकिन बहुत से लोग जानबूझकर गड़बड़ी करते हैं। - - - - - - - - - - - - - - - -

गलत सूचना का खामियाजा

ऑनलाइन रिटर्न फाइल करने के लिए दस्तावेज नहीं देने पड़ते। मकान किराया भत्ता, स्वास्थ्य बीमा, गृह ऋण, शिक्षा ऋण आदि की छूट बिना सबूत क्लेम कर सकते हैं लेकिन जांच में यह पकड़ में आ जाए कि करदाता ने जानबूझकर गलत छूट क्लेम की है और उसके सबूत पास नहीं हैं तो इसे कर अपवंचना माना जाएगा। ऐसे मामलों में कर अपवंचना का 200 फीसद तक जुर्माना लग सकता है। - - - - - - - - - - - - - - - -

फर्जी दावा पकड़ना आसान

सभी वित्तीय लेनदेन के लिए एक नंबर होता है। इससे आयकर विभाग उसकी सच्चाई का पता कर लेता है। अगर किसी इंश्योरेंस पॉलिसी की बात कही गई है तो विभाग पता कर सकता है कि वह पॉलिसी वास्तव में खरीदी भी गई है या नहीं। - - - - - - - - - - - - - - - -

हर दावे की हो रही जांच

चिकित्सा समेत ज्यादातर भत्तों का क्लेम तभी किया जा सकता है जब खर्च का सबूत नियोक्ता के पास जमा कर दिया जाए। इसके साथ नियोक्ता ने भत्ते का भुगतान किया हो और उसका ब्योरा फार्म 16 में दिया हो। - - - - - - - - - - - - - - - -

एचआरए में मकान मालिक का पैन भी

अगर किसी कंपनी का कर्मचारी मकान किराया भत्ता में वर्ष में एक लाख से अधिक की छूट का दावा करता है तो उसे मकान मालिक का पैन भी देना होगा।

Posted By: Jagran