कानपुर, [समीर दीक्षित]। पीएचडी करने वाले छात्र-छात्राएं अपनी सिनॉप्सिस या थीसिस में साहित्यिक चोरी (प्लेगरिज्म) नहीं कर सकेंगे। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की ओर से तैयार सॉफ्टवेयर 'उरकुंद' इस चोरी को तुरंत पकड़ लेगा। छत्रपति शाहू जी महाराज विवि में भी इस सॉफ्टवेयर का उपयोग शुरू कर दिया गया है। अब शोधार्थी जैसे ही अपनी थीसिस जमा करेंगे, उसकी जांच कराई जाएगी। जांच में सभी तथ्य सही होने पर थीसिस जमा होगी, अगर साहित्यिक चोरी मिलती है तो छात्र को रिवीजन का काम करना होगा।

इस तरह से काम करेगा उरकुंद

उरकुंद के कोआर्डिनेटर डॉ. आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि सबसे पहले रिसर्च स्कॉलर व गाइड का अकाउंट बनाया जाएगा। इसके लिए सबमिटर (रिसर्च स्कॉलर) और रिसीवर (गाइड) का विकल्प मौजूद रहेगा। जैसे ही रिसर्च स्कॉलर थीसिस जमा करेंगे, उसके बाद उरकुंद में उन तथ्यों का परीक्षण किया जाएगा। परीक्षण के बाद जो रिपोर्ट तैयार होगी, उसे गाइड देखेंगे। फिर साहित्यिक चोरी के लिए रिपोर्ट चेक होगी। यूजीसी मानकों के मुताबिक 10 फीसद तक साहित्यिक चोरी है तो रिपोर्ट को बदला नहीं जाएगा। अगर उससे ज्यादा है तो उसे गाइड को करेक्शन यानी तथ्यों को ठीक करने के लिए दे दिया जाएगा।

उपस्थिति भी दर्ज करानी होगी

पीएचडी करने वाले शोधार्थी छात्रों को अपने रिसर्च सेंटर में अब रोजाना उपस्थिति दर्ज करानी होगी। संबंधित केंद्र के प्राचार्य सभी शोधार्थी छात्रों की हाजिरी का ब्योरा तैयार करेंगे, जिसे संबंधित विवि द्वारा यूजीसी को भेजा जाएगा।

शिक्षक पर भी हो सकती है कार्रवाई

साहित्यिक चोरी रोकने और शोधपत्र की गुणवत्ता सुधारने में जुटे यूजीसी संबंधित गाइड यानि शिक्षक को भी कार्रवाई की जद में लाएगा। इनपर चार चरणों में कार्रवाई की जा सकेगी। चोरी दस फीसद से कम मिलने पर कार्रवाई नहीं होगी। 40 से 60 फीसद मिलने पर सालाना वेतन वृद्धि रोकने के साथ एमफिल व पीएचडी में दो साल तक गाइड बनने पर रोक लगाई जा सकती है। इससे अधिक साहित्यिक चोरी मिलने पर दो साल तक वेतन वृद्धि रोकने व तीन साल तक प्रतिबंध लग सकता है। 

Posted By: Abhishek

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