कानपुर, जेएनएन। आयुष्मान भारत (प्रधानमंत्री जन आरोग्य) योजना के लाभार्थी मरीजों की मदद के लिए तैनात आयुष्मान मित्र 'कमाई' में जुटे हैं। ये लाभार्थी मरीजों को दवाएं न देकर अस्पताल में भर्ती दूसरे मरीजों को बेच रहे हैं। मंगलवार को यह बात तब सामने आई जब भर्ती मरीज के पिता सस्ता इंजेक्शन खरीदने के लिए आयुष्मान मित्र को ढूंढते मिले। उन्होंने बताया कि आयुष्मान कर्मचारी ने एक हजार रुपये लेकर चार इंजेक्शन दिए थे। हैरानी की बात ये है कि ये इंजेक्शन अस्पताल के स्टॉक में ही नहीं है।

आर्थोपेडिक विभाग के वार्ड 2 में रघुनाथ का पुत्र सुभाष वर्मा भर्ती है। उनका कूल्हा प्रत्यारोपण हुआ है। डॉक्टर ने एंटीबायोटिक इंजेक्शन लिखे हैं, जो सुबह शाम लगते हैं। रघुनाथ ने बताया कि वार्ड में कई आयुष्मान कार्डधारक मरीज भर्ती हैं। इसलिए रात में आयुष्मान के कर्मचारी आते हैं। उन्होंने खुद दवाओं के बारे में पूछा और बाजार से कम कीमत में इंजेक्शन देने के लिए कहा। 250 रुपये के हिसाब से चार इंजेक्शन लिए। इनके खत्म होने पर जब अस्पताल के बाहर मेडिकल स्टोर पर गए तो एक इंजेक्शन 350 रुपये का मिला।

इसलिए आयुष्मान कर्मचारी को ढूंढ रहे हैं। उनके हाथ में इंजेक्शन की शीशी भी थी। यह हैलट के मुख्य औषधि भंडार में आपूर्ति होने वाला टैजोपिप इंजेक्शन था। अस्पताल की मोहर भी लगी थी। इसे केयरमैक्स कंपनी बनाती है। अस्पताल के स्टॉक में नहीं इंजेक्शन हैरानी की बात ये है कि आयुष्मान मित्र ने जिस टैजोपिप इंजेक्शन को बेचा वह अस्पताल के स्टॉक में है ही नहीं। बजट का संकट होने की वजह से इस समय इंजेक्शन की खरीद ही नहीं हो रही है। ऑर्डर पर मंगाते हैं, लेकिन देते नहीं इंजेक्शन अस्पताल में भर्ती आयुष्मान लाभार्थी मरीजों का आरोप है कि आयुष्मान कर्मी एक-दो दवाएं देकर सभी दवाएं मिलने की बात लिखा लेते हैं। वे इंजेक्शन एवं दवाएं ऑर्डर देकर मंगाते हैं, लेकिन मरीजों को नहीं देते और दूसरे मरीजों को बेच देते हैं।

-यह गंभीर मामला है। अगर आयुष्मान मित्र की पहचान होती है तो सख्त कार्रवाई करेंगे। उसके खिलाफ एफआइआर दर्ज कराकर जेल भेज देंगे। मरीज एवं उनके स्वजन किसी भी कर्मचारी को किसी तरह का कोई भुगतान न करें। - प्रो. आरती लालचंदानी, प्राचार्य, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज।

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