कानपुर (जागरण संवाददाता)। कारपोरेट सर्किल के व्यापारियों की जांच के मामलों में लापरवाही को देखते हुए वाणिज्य कर विभाग ने ई-हियरिंग की व्यवस्था की है। विभाग ने पाया है कि जांच को जानबूझ कर लंबित किया जाता है, वर्ष के अंत में उन्हें जल्दी-जल्दी निपटा दिया जाता है। इस संबंध में वाणिज्य कर आयुक्त कामिनी चौहान रतन का कहना है कि कारपोरेट सर्किल के वादों के निस्तारण के लिए यह प्रक्रिया अपनाई जाएगी। व्यापारी या उसके प्रतिनिधि को व्यक्तिगत रूप से कार्यालय में आने की जरूरत नहीं होगी। इससे वादों का निस्तारण भी तेजी से होगा।

यह था गठन का उद्देश्य

प्रदेश में वैट के दौरान कारपोरेट सर्किल का गठन इसलिए किया गया था ताकि सभी जोन की बड़ी 50 कंपनियों की जांच इसके तहत हो और इसकी मानीटरिंग  संयुक्त आयुक्त स्तर का अधिकारी करे। इसके लिए सभी जोन में एक-एक कारपोरेट सर्किल का गठन किया गया था।

ये मिल रही हैं शिकायतें

कारपोरेट सर्किल में कुछ समय से वादों के निस्तारण या कर निर्धारण में जानबूझ कर विलंब करने की शिकायतें आ रही हैं। अधिकारी इसे कारपोरेट सर्किल के गठन की मंशा के विपरीत मान रहे हैं। इस संबंध में वाणिज्य कर मुख्यालय ने साफ कहा है कि ऐसी कंपनियां बड़ी होती हैं और उनके पास पर्याप्त साफ्टवेयर होते हैं। ऐसे में यदि उनकी वार्षिक कर विवरणी में कोई त्रुटि या विसंगति नहीं पाई जाती है तो उसे स्वीकार कर लिया जाए। यदि किसी में त्रुटि पाई जाती है तो उसे ऑनलाइन नोटिस जारी करते हुए उसमें सुधार का मौका दिया जाए।

ये रहेगी ई-हियरिंग की प्रक्रिया

- स्पष्ट ऑनलाइन नोटिस जारी की जाएगी। इसमें सभी बिंदुओं का उल्लेख होगा।

- इस नोटिस में ही वांछित लेखा पुस्तकों के बारे में बताया जाएगा, जिन्हें ऑनलाइन प्रस्तुत करना है।

- ऑनलाइन नोटिस व्यापारी को ई-सर्विसेज लाग इन पर उपलब्ध हो जाएगी।

- रिप्लाई बटन पर क्लिक कर उत्तर देने के लिए स्क्रीन मिल जाएगी।  

Posted By: Abhishek