कानपुर( जागरण संवाददाता)। जाम से जूझते शहर को राहत दिलाने के लिए तमाम योजनाएं और तरीके अपनाए जा चुके हैं मगर, नतीजा ढाक के तीन पात रहा है। शहर के एक बड़े भाग को जाम करने में सीपीसी माल गोदाम की भूमिका को जिम्मेदार ठहराया जाए तो कुछ गलत नहीं होगा। अगर, यह गोदाम शहर से बाहर हो जाए तो घंटाघर और जरीब चौकी से लेकर आसपास क्षेत्रों को जाम से बचाया जा सकता है।

रेलवे बोर्ड के कार्यकारी निदेशक वित्त एवं वाणिज्य मधुकर सिन्हा के बीते दिनों दौरे से एक बार फिर उम्मीद जागी है कि देर सबेर माल गोदाम शहर के बाहर शिफ्ट हो सकेगा। वह गोदाम हटाए जाने के विकल्पों को देखने आए थे।  कोपरगंज स्थित सीपीसी गोदाम घंटाघर तक फैला है। इस गोदाम में प्रतिदिन तीन से चार रैक (प्रत्येक रैक में 45 से 65 वैगन होते हैं) माल आता है और इतनी ही रैक यहां से लोड होती है।

 माल की ढुलाई के लिए लगभग साढ़े तीन सौ ट्रक गोदाम के अंदर और बाहर सड़क पर खड़े रहते हैं। इनमें कुछ ट्रक सड़क को जाम कर देते हैं। कभी-कभी तो जाम इस कदर बढ़ जाता है कि सेंट्रल स्टेशन से ट्रेन पकडऩे वाले तमाम यात्रियों की ट्रेनें तक छूट जाती हैं। इसके अलावा मालगाडिय़ों की भी अपनी समस्या है। दिल्ली- हावड़ा व झांसी की ट्रेनें एक के पीछे एक लगी रहती हैं जिससे जूही यार्ड खाली नहीं हो पाता और ट्रैक खाली होने के इंतजार में मालगाडिय़ों को जूही में कई दिन तक रोकना पड़ता है।

ऐसे लगता है जाम

- सीपीसी गोदाम से कालपी रोड जाने वाले ट्रकों से कोपरगंज बासमंडी, डिप्टी पड़ाव, जरीब चौकी, फजलगंज तक जाम लगता है।

- सीपीसी गोदाम से किदवई नगर चालीस दुकान होते हुए जाने वाले ट्रकों से झकरकटी पुल, टाटमिल, ट्रांसपोर्ट नगर, किदवई नगर चालीस दुकान तक जाम।

- सीपीसी गोदाम से जाने वाली ट्रकों से झकरकटी पुल, अफीमकोठी, जरीब चौकी, कालपी रोड जाम होती है।

यह बनाई गई थी योजना

- मुंबई, झांसी की ओर से आने वाली मालगाडिय़ां भीमसेन के गोदाम में ही रुक जाएं।

- दिल्ली की ओर से आने वाली मालगाडिय़ां माल उतारने के लिए पनकी में ही रोकी जाएं।

शिफ्टिंग है नया विकल्प

पुरानी योजनाओं पर काम नहीं हो सका है। इस दौरान डेडीकेटेड फ्रेट कॉरीडोर बनने के बाद यह सुझाव दिया गया है कि सीपीसी माल गोदाम भाऊपुर शिफ्ट कर दिया जाए। इससे शहर को जाम से मुक्ति मिल जाएगी, माल ढुलाई में भी आसानी होगी। रेलवे बोर्ड के कार्यकारी निदेशक वित्त एवं वाणिज्य मुधकर सिन्हा इन्हीं विकल्पों को देखने के लिए तीन नवंबर को कानपुर पहुंचे थे।  

Posted By: Abhishek