कानपुर (जागरण संवाददाता)। सोशल इंजीनियरिंग के सहारे लोकसभा चुनाव में जीत हासिल करने की जुगत में लगी बसपा अब रूठों को मनाने में जुटी हुई है। यही नहीं दूसरी पार्टियों में उपेक्षित नेताओं को भी साथ लाने की कोशिश कर रही है। इतना ही नहीं, पार्टी ने एक बार फिर भाईचारा कमेटियों को सक्रिय कर दिया है।

 लोकसभा चुनाव 2019 में हैं। इसके लिए जहां दूसरी पार्टियां जोर शोर से तैयारियों में जुटी हैं वहीं बसपा खामोशी के साथ कदम बढ़ा आधार को मजबूत करने में जुटी है। बसपा में कई ऐसे नेता हैं जो पूर्व में पार्टी के सिंबल पर विधायक बने, लेकिन अब वह पार्टी के कार्यक्रमों से दूर हैं। पूर्व में विधानसभा चुनाव लड़ चुके तमाम नेताओं को भी अब पार्टी की बैठकों में आने की फुर्सत नहीं है। ऐसे नेताओं को अब फिर से पार्टी की बैठकों में बुलाने और उन्हें यह बताने की कोशिश की जा रही है कि केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार के विरुद्ध माहौल बनाकर बसपा मजबूत होगी और ज्यादा से ज्यादा सीटें मिलेंगी।

इसलिए वह बैठकों में आएं और नए लोगों को भी पार्टी से जोड़ें। इन नेताओं को फिर से सक्रिय करने के लिए कई बड़े नेताओं को लगाया गया है। पूर्व में पार्टी छोड़ गए नेताओं की भी वापसी कराई जा रही है। लोकसभा चुनाव लड़ चुके सलीम अहमद ने भी पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी के साथ बसपा से किनारा कर लिया था, लेकिन अब उनकी वापसी हो गई है।

इसके साथ ही बसपा अपने आधार वोट को एक बार फिर से जोडऩे की कवायद में जुट गई है। इसके लिए भाईचारा कमेटियों की जिम्मेदारी तेज तर्रार कार्यकर्ताओं को सौंपी गई है। बसपा में बूथ कमेटी बनाने का काम भी तेजी से शुरू हो चुका है। कार्यकर्ताओं को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वह ऐसे मतदाताओं के नाम को सूची से जुड़वाएं जिनके नाम कट गए हैं या जिनके नाम नहीं हैं। 

Posted By: Abhishek