जागरण संवाददाता, कानपुर : उर्सला अस्पताल के निदेशक कार्यालय में तैनात वरिष्ठ सहायक (बाबू) विभिन्न विभागों के कर्मचारियों व अधिकारियों के मेडिकल रिम्बर्समेंट का बिल पास करने के लिए बिल का पांच फीसद रिश्वत के रूप में लेता था। आरोप है कि इस राशि का हिस्सा ऊपर के अफसरों को भी जाता था।

जिला अस्पताल उर्सला में चिकित्सा प्रतिपूर्ति व्यय बिल (मेडिकल रिम्बर्समेंट) का कार्य वरिष्ठ सहायक नीरज द्विवेदी देखते थे। 35 विभागों में तैनात कर्मचारी स्वयं, परिजनों का इलाज कराने के उपरांत बिल पास कराने के लिए जमा करते थे। निर्धारित मानकों के अनुरूप बिल चेक करने के उपरांत पास होते थे। कर्मचारियों का आरोप है कि जितनी राशि बिल में लिखी होती थी, उसका पांच फीसद हिस्सा वह पहले ही ले लेते थे। इसके बाद ही बिल पास होता था। उर्सला के कुछ कर्मचारियों का आरोप है कि यह रिश्वत ऊपर के अफसरों के पास भी जाती थी। यही वजह है कि लिपिक मनमाने तरीके से काम करता था।

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गिरफ्तारी के बाद कार्यालय

आर्थिक अपराध शाखा द्वारा उर्सला अस्पताल के निदेशक कार्यालय से वरिष्ठ सहायक की गिरफ्तारी के बाद कार्यालय में ताला बंद हो गया। अन्य कर्मचारी भी दहशत में आ गए हैं। सभी समय से पहले की कार्यालय छोड़कर निकल गए।

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कम समय में अर्जित की संपत्ति

वरिष्ठ सहायक लगभग 20 साल से नौकरी कर रहे हैं। वह कानपुर देहात के रसूलाबाद के पलिया गांव निवासी हैं। इन्होंने हाल में अपने गांव का मकान बनवाया है। उनका नौबस्ता में भी एक मकान है। इसके अलावा दो साल पहले शहर की सबसे बड़ी एवं सुविधाओं से सुसज्जित टाउनशिप में भी एक मकान बुक कराया है।

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निदेशक का नहीं उठा फोन

इस घटनाक्रम के उपरांत उर्सला अस्पताल के निदेशक डॉ. उमाकांत को कॉल भी किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। कार्यालय में भी मौजूद नहीं थे।

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दो साल पहले हुआ था स्थानांतरण

उर्सला अस्पताल में तैनात बाबू नीरज का वर्ष 2016 में सीएमओ कार्यालय स्थानांतरण हो गया था। इस पर उन्होंने ज्वाइन नहीं किया। अपना स्थानांतरण रुकवाने के साथ पुराना पटल भी हासिल कर लिया।

Posted By: Jagran