जागरण संवाददाता, कानपुर : दो हजार से अधिक छतों पर लगी अवैध होर्डिग खतरा बनी हुई हैं। मंगलवार को आयी आंधी में ऐसी ही एक होर्डिग दुकानों पर गिरी तो दहशत फैल गयी। नगर निगम ने जहां इसे अवैध बताया वहीं मकान मालिक नगर निगम की अनुमति से होर्डिग लगाने का दावा कर रहा है।

बीते दिनों से लगातार आ रही तेज आंधी को देखते हुए नगर निगम प्रशासन ने शहर भर में मकानों के ऊपर जहां तहां लगी होर्डिग को अवैध करार दिया था। सार्वजनिक विज्ञापन निकालकर मकान मालिकों को तत्काल इन्हे हटाने के निर्देश दिए गए थे। बावजूद इसके शहर के दो हजार से ज्यादा मकानों की छत पर आज भी होर्डिग लगी हुई हैं जो जान माल के लिए कभी भी बड़ा खतरा बन सकती हैं। मंगलवार को आयी तेज आंधी में रावतपुर स्टेशन के सामने स्थित एक मकान की छत पर लगी होर्डिग सपा जिलाध्यक्ष मोईन खान के मेडिकल स्टोर की छत पर तेज आवाज के साथ होर्डिग गिर गई। इससे पूरे दिन दहशत बनी रही। यह होर्डिग दस साल से लगी बताई गई। कई बार दुकान मालिक से कहा, लेकिन उन्होंने हटाने का प्रयास नहीं किया।

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ठेकेदार देता है तीन हजार प्रतिमाह

दुकान मालिक सुरेंद्र कनौजिया ने बताया कि ठेकेदार विशाल ने विज्ञापन के लिए 8-9 वर्ष पूर्व होर्डिग लगवायी थी। होर्डिग में विज्ञापन के एवज में प्रतिमाह तीन हजार रुपये देता है। नगर निगम से अनुमति होने के सवाल पर सुरेंद्र ने बताया कि विशाल के पास इसकी अनुमति है।

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अवैध होर्डिग से लाखों की कमाई, राजस्व शून्य

शहर के किदवई नगर, नौबस्ता, गोविंद नगर, साकेत नगर, काकादेव, रावतपुर, कल्याणपुर, जीटी रोड, लालबंगला, चकेरी समेत अन्य कई क्षेत्रों में मकानों पर अवैध होर्डिग लगी हुई हैं। कथित ठेकेदार नगर निगम से अनुमति की बात कहकर मकानों और दुकानों की छत पर होर्डिग लगवा देते हैं। विज्ञापन के नाम पर मासिक 15 से 20 हजार रुपये कमाते हैं और मकान मालिकों को प्रतिमाह पांच से दस हजार रुपये किराया देते हैं। अफसरों की मिली भगत से होने वाले इस खेल में नगर निगम को एक पैसे का राजस्व प्राप्त नहीं होता है।

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रावतपुर में दुकानों पर गिरी होर्डिग अवैध है। शहर में 125 से ज्यादा ऐसी होर्डिग सूचीबद्ध की गई थीं। नगर निगम विज्ञापन निकालकर ऐसी सभी होर्डिगों को अवैध घोषित कर चुका है।

-राजीव शुक्ल, विज्ञापन प्रभारी नगर निगम

Posted By: Jagran