संवाद सहयोगी, तिर्वा : राजकीय मेडिकल कॉलेज में आठ वर्ष तक कागजों में बिना टेंडर सेवाप्रदाता को भुगतान होते रहे। वर्ष 2016 से 2019 तक टेंडर चला। इसके बाद अब फिर से संस्था को टेंडर देने की तैयारी चल रही है। राजकीय मेडिकल कॉलेज में वर्ष 2009 में ओपीडी शुरू की गई थी। उस समय लखनऊ की एक सेवाप्रदाता को कर्मचारियों की उपलब्धता कराने की जिम्मेदारी दी गई थी। वर्तमान में सेवाप्रदाता से 317 कर्मचारियों के नाम से प्रतिमाह करीब 38 लाख का भुगतान किया जा रहा है। इसमें वार्ड आया, वार्ड ब्वाय, सफाई कर्मी, सिक्योरिटी गार्ड, टेक्नीशियन समेत कई कर्मचारी कार्यरत है। सेवाप्रदाता के खिलाफ धांधली करने को लेकर कई बार शिकायतें की गई, लेकिन जांच में क्लीन चिट मिलती रही। दूसरी सेवाप्रदाता को टेंडर नहीं मिलीभगत के कारण दूसरी सेवाप्रदाता को टेंडर नहीं दिया जा सका, जबकि सेवाप्रदाता के कर्मचारी बराबर विवाद व अपराधों में संलिप्त रहते हैं। यहां से चयनित किए गए कर्मचारियों का सत्यापन पुलिस से नहीं कराया जाता है। इससे फर्जी प्रपत्रों के सहारे भुगतान होता रहता है। एक माह भी नहीं चली बायो मीट्रिक कर्मचारियों की उपस्थिति में पारदर्शिता लाने के लिए बायोमीट्रिक मशीन लगाई गई। कुछ दिन तक उपस्थिति चली, लेकिन उससे भी पारदर्शिता नहीं रह सकी, जो बंदकर दी गई। वर्ष 2019 में टेंडर का समय पूरा हो गया था। अब संस्था का बिलों पर भुगतान किया जा रहा। इस वर्ष केंद्र सरकार के नियमों के आधार पर जैम पोर्टल से टेंडर किया जा रहा है। इसमें सबसे कम दर वाली फर्म को वरियता दी जाएगी। डॉ. नवनीत कुमार, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कॉलेज

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