जागरण संवाददाता, कन्नौज: ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों का इलाज करने के लिए खोले गए सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खुद बीमार हैं। यहां मरीजों को परामर्श देने या इलाज करने के बजाय जिला अस्पताल भेज दिया जाता है। निजी प्रैक्टिस के कारण ओपीडी में चिकित्सक नहीं बैठते। स्वास्थ्य कर्मी भी अन्य काम निपटाते हैं। ऐसे में मरीज व तीमारदारों के पास निजी या जिला अस्पताल जाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता।

कहने को जिला अस्पताल की तर्ज पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र 24 घंटे खुलते हैं लेकिन हकीकत इससे इतर है। जिले के अधिकतर सीएचसी दोपहर बाद बंद हो जाते हैं। शाम होते ही कर्मी भी घर भाग जाते हैं। बिजली, पानी, दवा, इंजेक्शन, ग्लूकोज तक न मिलने से मरीज व तीमारदार स्वास्थ्य केंद्र न जाकर सीधा जिला अस्पताल या फिर राजकीय मेडिकल कालेज जाते हैं। दुर्घटना या आकस्मिक स्थिति में रेफर का पर्चा पकड़ा दिया जाता है। यही हाल पीएचसी का है। इनके खुलने व बंद होने का कोई समय निश्चित नहीं है। चिकित्सक व कर्मी मरीजों व तीमारदारों से ठीक से बात तक नहीं करते। आए दिन सीएचसी व पीएचसी में हंगामा और मारपीट की घटनाएं होती हैं। 102 व 108 एंबुलेंस भी समय पर नहीं पहुंचती हैं।

स्ट्रेचर व बेड टूटे, फटी चादरें व गद्दे खोलते पोल

जिला अस्पताल व राजकीय मेडिकल कालेज के साथ सीएचसी व पीएचसी भी बदहाल हैं। स्ट्रेचर व बेड टूटे हैं तो गद्दे व फटी चादरें स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोलती हैं। ऐसे में तीमारदार खुद इंतजाम जुटाते हैं। टेक्नीशियन की कमी से लैब बंद हैं। सफाई कर्मियों की कमी से परिसर की सफाई भी ठीक तरह से नहीं होती है। जगह-जगह फैली गंदगी से मरीज और बीमार हो जाते हैं। अधिकांश स्वास्थ्य केंद्रों पर झाड़ियां व घास उगी हुई हैं। परिसर में कुत्ते आराम फरमाते हैं।

चिकित्सक व कर्मियों की कमी

सूबे में चिकित्सक व स्वास्थ्य कर्मियों की कमी भी मरीजों के इलाज में बाधक है। जिले में 11 सामुदायिक व 28 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। सभी में दो-दो चिकित्सकों व अन्य स्टाफ की जरूरत है। तमाम सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर चिकित्सक नहीं हैं। सीएमओ सभी जगह एक-एक चिकित्सकों की तैनाती कर चुके हैं लेकिन विशेषज्ञों की कमी के कारण हालात नहीं सुधर पा रहे हैं।

इमरजेंसी व्यवस्था फेल

छिबरामऊ के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सकरावा में दो दिन पहले डीएम के निरीक्षण की जानकारी होने पर सफाई करवाई गई है। रात में गंभीर मरीज के आने पर इमरजेंसी व्यवस्था बदहाल है। ऐसे में सौरिख, छिबरामऊ या तिर्वा मरीजों को भेजा जाता है।

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शासन ने आदेश जारी किया है कि अब नई पीएचसी पर बीएएमएस एवं सीएचसी पर एमबीबीएस तैनात किए जाएंगे। अधिकतर अस्पतालों में संविदा पर चिकित्सक आ गए हैं।

-डा. राहुल मिश्रा, प्रभारी चिकित्साधिकारी, छिबरामऊ

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सभी प्राथमिक व स्वास्थ्य केंद्र पर इंतजाम हैं। मरीजों को हर तरह की सुविधाएं मिलती हैं। विशेषज्ञों की कमी के कारण थोड़ा दिक्कत है। स्वास्थ्य सेवाओं के सुधार के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

-डा. कृष्ण स्वरूप, मुख्य चिकित्सा अधिकारी

Posted By: Jagran