संवाद सूत्र, जलालाबाद : सरकार के लाख प्रयास के बाद भी शिक्षा का स्तर सुधरने का नाम नहीं ले रहा है। जिससे छात्र छात्राओं का भविष्य अंधकार में डूब रहा है। सरकारी विद्यालयों के शिक्षक अपने बच्चों को तो कान्वेंट स्कूलों में अच्छी शिक्षा दिलवाकर डॉक्टर, इंजीनियर व अधिकारी बनाना चाहते हैं लेकिन गांव के गरीब बच्चों के प्रति घोर लापरवाही बरत रहे हैं।

मंगलवार को जागरण टीम जब प्राथमिक विद्यालय सरैया तेरारगी में सुबह 8:20 बजे पहुंची तो विद्यालय परिसर में बच्चे झाड़ू लगाते मिले। इस विद्यालय में कुल 92 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं जिनमें से 12 छात्र उपस्थिति मिले। 8:20 बजे सहायक अध्यापिका समि गौतम तथा 8:25 बजे प्रधानाध्यपक मनोज यादव विद्यालय में पहुंचे। विद्यालय के गेट की चाबी कक्षा चार की छात्रा रंजना के पास रहती है। वहीं उच्च प्राथमिक विद्यालय तेरारगी में सुबह आठ बजे प्रार्थना हो रही थी। इस विद्यालय में 80 छात्र छात्राएं पंजीकृत हैं जिसमें से 40 की उपस्थिति थे। आठ बजे तक सहायक अध्यापिका दिव्या विद्यालय में नहीं पहुंची थीं। प्राथमिक विद्यालय देवीपुरवा में करीब 8:28 बजे तक ताला ही नहीं खुला था। प्रधानाध्यापक रामशंकर, सहायक अध्यापिका शिवांगी गुप्ता विद्यालय खुलने के इंतजार में बैठे थे। विद्यालय की चाबी रसोईया सियावती के पास रहती है। रसोईया के पास चाबी होने के सवाल पर कोई जवाब नहीं दिया गया। इस विद्यालय में 66 बच्चे पंजीकृत हैं जिसमें केवल पांच ही उपस्थित पाये गये।

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अगर ऐसा है तो इसकी जांच कर कार्रवाई होगी। समय से स्कूल न पहुंचने वाले शिक्षकों पर कड़ी कार्रवाई होगी। -दीपिका चतुर्वेदी, बीएसए।

Posted By: Jagran