जागरण संवाददाता, कन्नौज: अमेरिकन कीट ने जिले में तीसरी बार हमला किया है। इससे किसानों और कृषि अफसरों की नींद उड़ गई है। यह कीट करीब 60 फीसद तक उपज प्रभावित होती है। यह बढ़ते हुए छोटे पौधों को अधिक नुकसान पहुंचाता है। पौधे में मादा करीब दो हजार अंडे देती है, वो पत्तियों को ही अपना भोजन बनाती है, इस कारण से उपज प्रभावित होती है।

जनपद में करीब 55 हजार से 60 हजार हेक्टेयर रकबा में बसंती मक्का होती है। कीट के हमले से ये फसल अब खतरे में हैं। जिले में 2018 में यह कीड़ा कर्नाटक से आया था। तब इसने कन्नौज, छिबरामऊ, कसावा, तालग्राम जलालाबाद व उमर्दा के 23 गांवों में मक्का की फसल को नष्ट कर दिया था। जमीन में लार्वा पनपने से 2019 में इसने फिर हमला किया। इस साल इसने कन्नौज, जलालपुर सरवन, उमर्दा के जैनपुर गांव में मक्का बर्बाद की। अब ये इसका तीसरा हमला है। विशेषज्ञ बताते हैं कि फ़ॉल आर्मीवर्म फसल के किसी भी चरण में पौधे के सभी हिस्सों पर हमला करता है। मादा कीट एक बार में पांच हजार अंडे देती है। इन कीटों के एक महीने बाद पंख निकल आते हैं। इससे यह उड़कर एक से दूसरे स्थान पर फसल को चपेट में लेते हैं। एक घंटे में 100 किमी तक उड़ते हैं। जिला कृषि अधिकारी राममिलन सिंह परिहार ने बताया कि किसानों को इसके प्रति जागरूक किया जा रहा है। बचाव के लिए उन्हें उपाय बताए जा रहे हैं।

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ऐसे करें पहचान

कृषि अफसर बताते हैं छोटी से तीसरी अवस्था तक इसके लार्वा को पहचानना मुश्किल है। मगर जैसे-जैसे ये बड़ा होता है, इसकी पहचान आसान हो जाती है। इसके सिर पर उलटी वाई के आकार का निशान दिखाई देती है। साथ ही लार्वा के 8 वे बॉडी सेगमेंट पर 4 बिदु वर्गाकार आकृति में देखे जा सकते हैं।

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ऐसे पहुंचाता नुकसान

पौधों की पत्तियों को छोटा लार्वा खुरचकर खाता है। जिससे पत्तियों पर सफेद धारियां दिखाई देती हैं। जैसे-जैसे लार्वा बड़ा होता है, पौधों की ऊपरी पत्तियों को खा जाता है। जब लार्वा बड़ा हो जाता है तब वह मक्का के गाले में घुसकर पत्तियां खाता रहता है। पत्तियों पर बड़े गोल-गोल छिद्र एक ही कतार में नजर आते हैं।