जागरण संवाददाता, कन्नौज: दीपावली के अवसर पर बाजार में इस बार ड्रैगन का दबदबा कम हो गया है। हर साल घरों को सजाने के लिए प्रयुक्त होने वालीं चाइनीज झालरें इस बार नहीं दिखाईं दे रहीं हैं। चीन से व्यापारिक रिश्ते खत्म होने के बाद लोगों ने चाइनीज उत्पादों का बहिष्कार किया है, तो वहीं दुकानदारों ने भी माल को बेचना बंद कर दिया है।

भारत-चीन सीमा विवाद के बाद इस बार दीपावली में व्यापारियों ने चाइनीज झालरों के आर्डर बुक नहीं किए हैं। दो माह पहले ही व्यापारी लगभग एक करोड़ के आर्डर दे देते थे, लेकिन बाजार में इस बार भारतीय झालरों की ही धूम रहेगी।

दीपावली पर लोग बिजली की झालरों से घरों व प्रतिष्ठानों को सजाते हैं। इस कारण बाजारों में चाइनीज झालरों का 90 फीसद कब्जा रहा है। सिर्फ दस फीसद ही स्वदेशी झालरों की बिक्री होती थी, लेकिन इस बार भारत-चीन के बीच व्यापारिक रिश्ते खत्म होने के बाद बाजार में ड्रैगन का दबदबा कम हो गया है। बाजार में चाइनीज झालरें नहीं दिख रहीं है। इलेक्ट्रानिक्स की दुकानों पर चाइनीज की तरह की दिखने वाली भारतीय झालरों की बिक्री हो रही है। हालांकि ये चाइनीज झालरों की अपेक्षा थोड़ी महंगी है, लेकिन स्वदेशी होने के कारण इनकी जमकर खरीदारी हो रही हैं। -----------------------

बाजार में बढ़ी स्वदेशी झालरों की मांग

व्यापारी नरायन दास कंजानी बेबू ने बताया कि दीपावली आने से दो माह पहले चाइनीज झालरों के आर्डर दिए जाते थे, जो इस बार बुक नहीं किए गए हैं। शहर में एक करोड़ रुपये से अधिक की झालरों का हर वर्ष कारोबार होता है। इस बार स्वदेशी झालरों की धूम रहेगी। वहीं बीते साल की बची चाइनीज झालरें ही बाजार में दिख सकती है। उन्होंने बताया कि बाजार में स्वदेशी झालरों की मांग बढ़ी है।

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