कन्नौज, जागरण संवाददाता: एक खरपतवार से मादक सुगंध तलाशने में करीब 40 वर्ष का वक्त लग गया, लेकिन जब सफलता मिली तो ऐसी कि आज पूरे विश्व में उसकी मांग है। आयुर्वेद गुणों के साथ अपनी भीनी खुशबू के लिए अब वह पूरी दुनियां में जाना जाता है। शोध करने वाले इत्र व्यवसाई को इस सफलता पर बनारस विश्वविद्यालय के फार्मेसी विभाग ने सम्मानित भी किया है।

खेतों में उगने वाले सामान्य खरपतवार की तरह नागरमोथा को आज से 40 वर्ष पहले कोई जानता भी नहीं था। लेकिन बनारस विश्व विद्यालय से पढ़कर लौटे शहर के इत्र उद्यमी जगत नरायन कपूर की निगाह इस पौधे की जड़ पर पड़ी। करीब 40 वर्ष तक चले शोध के बाद वह नागरमोथा से मादक सुगंध निकालने में कामयाब हो गए। जब यह सुगंध बाजार में आई तो भीनी और आकर्षक खुशबू के कारण इसकी डिमांड बढ़ गई। इनकी इस उपलब्धि पर विगत मार्च 2015 में वाराणस हिंदू विश्वविद्यालय ने उद्यमी जगत नरायन कपूर को विशेष आयोजन कर सम्मानित भी किया है।

काफी उपयोगी साबित हो रहा तेल

अब तो गर्म तासीर वाले नागरमोथा के तेल का इस्तेमाल परफ्यूमरी प्रोडक्ट के अलावा आर्युवेदिक चिकित्सा में भी इस्तेमाल बहुतायत किया जा रहा है। अब नागरमोथा से तेल निकालने का काम पूरे कन्नौज में बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। फिलवक्त नागरमोथा का 10 टन से अधिक उत्पादन किया जा रहा है और इसकी सप्लाई देश के अलावा विदेश के कई देश में हो रहा है। इसमें खाड़ी देशों के अलावा फ्रांस में भी शामिल है। फ्रांस आदि देशों में इसे मैगनेटिक नाम की सुगंध में बहुतायत किया जाता है।

मांग बढ़ी के सापेक्ष नहीं उपलब्धता कन्नौज में नागरमोथा से तेल उत्पादन लगातार होने लगा तो इसकी उपलब्धता धीरे-धीरे घटने लगी है। कारण यह अभी तक खरपतवार के रूप में ही पाया जाता है। नागरमोथा भारत के उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश के अलावा नेपाल के कुछ हिस्सों में पाया जाता है। यह अपने आप ही पैदा होता है। उपलब्धता कम होने के कारण अब इसके दामों में भी इजाफा होने लगा है।

एफएफडीसी ने शुरू किए प्रयास

अभी तक जंगली घास के तौर पर उगने वाले नागरमोथा की भविष्य में कमी की आशंका को देखते हुए सुगंध एवं सुरस विकास केंद्र की ओर से डिपार्टमेंट आफ बायो टेक्नोलाजी को एक प्रस्ताव भेजा गया है। इसमें देश में पाई जाने वाली नागरमोथा की प्रजातियों को संकलित कर वैज्ञानिक स्तर पर खेती करने के लिए शोध किया जाएगा। यह प्रस्ताव अभी स्वीकृत नहीं हुआ है।

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नागरमोथा की खोज किसने किया है, यह कहीं अभिलेख में तो नहीं है, लेकिन कन्नौज में ही इसका उत्पादन शुरू हुआ है, यह सही है। इस समय विश्व में इसके तेल की मांग है। इसलिए भविष्य में इसकी वैज्ञानिक खेती कराने पर शोध करने की रणनीति तैयार की जा रही है।''

- शक्ति विनय शुक्ला, प्रधान निदेशक, सुगंध एवं सुरस विकास केंद्र।