अमरोहा। गौशाला से ही गौवंशीय पशु सुपुर्दगी के नाम पर वधशाला भेजे जा रहे हैं। यह बात दो दिन पूर्व एक टाटा गाड़ी पकड़े जाने के बाद सामने आने पर पुलिस के कान खड़े हो गए हैं। हालांकि पुलिस ने गौशाला समिति के प्रबंधक व वाहन चालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है, लेकिन इस अभियोग के आधार पर गौशालाओं के भौतिक सत्यापन की मांग भी तेज हो गई है।

पशु बध व तस्करी रोकने को पकड़े जाने वाले गौवंशीय पशुओं को पुलिस गौशाला ही भिजवा देती है। इन गौशालाओं में पशु कितने दिन सुरक्षित रहते हैं, इसको लेकर भी अब सवाल खड़े होने लगे हैं। चूंकि जिन समिति के द्वारा गौशाला समितियों का रजिस्ट्रेशन कराकर खोली जा रही हैं, उन पर भी उंगली उठने लगी है। स्थानीय थाना क्षेत्र के मझोला गांव में नंदी गजरौला सेवा समिति के द्वारा गौशाला दो माह पहले ही खोली गई। इसके बाद पुलिस ने पकड़ में आने वाले गौवंशीय पशु भी इसी गौशाला भेजने शुरू कर दिए। हालांकि इस गौशाला में कुल कितने पशु भेजे गए, यह आंकड़ा तो उपलब्ध नहीं हो पाया, लेकिन दो दिन पहले इस गौशाला से नियमों को ताक पर रख कर पांच गौवंशीय पशु जिस तरह सुपुर्दगी में दिए गए। उससे सुपुर्दगी नामे की आड़ में पशुओं की तस्करी कर उन्हें वधशाला भेजने का ही संकेत सामने आया। परमिट जारी करने वाले नोडल अधिकारी की भूमिका भी संदिग्ध नजर आई। इसी आधार पर गौशाला के भौतिक सत्यापन की मांग उठने लगी है। पीएफए के पश्चिमी प्रभारी रविंद्र शुक्ला ने बताया कि इस बारे में डीएम को पत्र भेजा गया है। पत्र में गौशाला का भौतिक सत्यापन कराकर इसकी जांच कराने को कहा गया है कि दो माह में विभिन्न थानों की पुलिस द्वारा जो गौवंशीय पशु वहां दाखिल किए गए, वह उपलब्ध हैं या नहीं।

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दो गौशालाओं पर लगा है प्रतिबंध

गौवंशीय पशुओं न भेजने के लिए डीएम भवनाथ सिह द्वारा दो गौशालाओं पर प्रतिबंध लगा दिया है। इनमें एक डिडौली के इकौंदा गांव की तो दूसरी रजबपुर क्षेत्र की कृष्ण गौशाला शामिल है। इन गौशालाओं में गौवंशीय पशु नहीं भेजने के लिए डीएम द्वारा सभी थानों को आदेश भी दिए गए थे।

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