विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

फ्रांस में चमकेगा उत्तर प्रदेश का पारीछा बांध, 'विश्व धरोहर' का दर्जा मिलने से बुंदेलखंड में बढ़ेगा टूरिज्म

By Sakshi GuptaEdited By: Sakshi Gupta
Published: Wed, 07 Oct 2026 04:32 PM (IST)

Parichha Dam | झांसी स्थित 140 वर्ष पुराने पारीछा बांध को अंतर्राष्ट्रीय सिंचाई एवं जल निकासी आयोग द्वारा विश्व धरोहर सिंचाई संरचना के रूप में मान्यता मिली है।

Parichha Dam | पारीक्षा बांध।

Parichha Dam | पारीक्षा बांध।

HighLights

  1. पारीछा बांध को विश्व धरोहर सिंचाई संरचना के रूप में मान्यता।

  2. 140 वर्ष पुराना बांध आज भी कृषि और जलापूर्ति में सक्रिय।

  3. केन-बेतवा लिंक परियोजना में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

साक्षी गुप्ता, झांसी। Parichha Dam | उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक धरोहरों को वैश्विक पटल पर एक और बड़ी पहचान मिली है। झांसी स्थित 140 वर्ष पुराने ऐतिहासिक पारीछा बांध (Parichha Dam) को अंतर्राष्ट्रीय सिंचाई एवं जल निकासी आयोग द्वारा विश्व धरोहर सिंचाई संरचना के रूप में मान्यता प्रदान की गई है।

इस उपलब्धि के साथ ही बुंदेलखंड की यह ऐतिहासिक सिंचाई संरचना अब आधिकारिक तौर पर वैश्विक विरासत मानचित्र पर दर्ज हो गई है।

आगामी 14 अक्टूबर को फ्रांस के मार्सेई में आयोजित होने वाली 26वीं ICID अंतर्राष्ट्रीय कांग्रेस और 77वीं अंतर्राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद की बैठक के दौरान यूपी के सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग को 'WHIS अवॉर्ड-2026' से सम्मानित किया जाएगा।

क्यों मिला 'विश्व धरोहर' का दर्जा? 

अंतर्राष्ट्रीय आयोग द्वारा यह सम्मान उन चुनिंदा सिंचाई संरचनाओं को दिया जाता है, जो 100 वर्ष से अधिक पुरानी होने के बावजूद आज भी पूर्ण रूप से कार्यशील हैं और क्षेत्रीय कृषि व जलापूर्ति में अहम योगदान दे रही हैं। 140 वर्षों का सफर तय करने के बाद भी पारीछा बांध की मजबूती और उपयोगिता बेमिसाल बनी हुई है।

कैप्टन स्ट्रेची की सोच से लेकर निर्माण तक

  • 1855 में सूखा प्रभावित बुंदेलखंड में सिंचाई व्यवस्था दुरुस्त करने का विचार सबसे पहले कैप्टन स्ट्रेची ने विस्तृत सर्वे के बाद प्रस्तावित किया था।
  • 1881 में झांसी में बेतवा नदी पर करीब 40 लाख रुपये की अनुमानित लागत से पारीछा वीयर का निर्माण कार्य शुरू हुआ।
  • पारीक्षा बांध और इससे जुड़ी बेतवा नहर प्रणाली 1886 में पूरी तरह कार्यशील हुई और बुंदेलखंड के खेतों तक पानी पहुंचाने लगी।
WhatsApp Image 2026-10-07 at 2.36.15 PM

इंजीनियरिंग का कमाल और जल भंडारण क्षमता

  • पारीछा बांध करीब 1,174 मीटर लंबा और नदी तल से 16.8 मीटर ऊंचा है। इसमें जल स्तर नियंत्रित करने के लिए 318 स्टील के विशेष गेट लगे हैं।
  • पहले इसकी जल भंडारण क्षमता लगभग 1,700 मिलियन क्यूबिक फीट (MCFT) थी, जिसे आधुनिक तकनीकों से बढ़ाकर अब 2,400 मिलियन क्यूबिक फीट (MCFT) कर दिया गया है।
  • यह बांध न केवल उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के विस्तृत इलाकों में फसलों को सींचता है, बल्कि झांसी स्थित 920 मेगावाट क्षमता वाले पारीछा थर्मल पावर प्रोजेक्ट को भी आवश्यक पानी की आपूर्ति करता है।

पर्यटन और प्राकृतिक सुंदरता का केंद्र

बेतवा नदी के विशाल पाट पर बसा पारीछा बांध अपने मनोरम दृश्यों के लिए जाना जाता है। मानसून के समय जब इसके 12 से ज्यादा गेट एक साथ खोले जाते हैं, तो पानी का कलकल बहता तीव्र प्रवाह और दूधिया फुहारें देखने लायक होती हैं।

News Article Hero Image

नौकायन और पिकनिक स्पॉट

बांध का जलाशय शांत और विशाल है, जो स्थानीय निवासियों और दूर-दराज से आने वाले पर्यटकों के लिए वॉटर स्पोर्ट्स, नौकायन (Boating) और फैमिली पिकनिक का एक पसंदीदा स्थान बन चुका है।

केन-बेतवा लिंक परियोजना और भविष्य का महत्व

बुंदेलखंड के लिए वरदान साबित होने जा रही महत्वाकांक्षी केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना (Ken-Betwa Link Project) में भी पारीछा वीयर की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होने वाली है। पानी के पुनर्प्रबंधन और वितरण में इसका उपयोग बुंदेलखंड को पूरी तरह सूखा-मुक्त बनाने में सहायक होगा।

यह भी पढ़ें- झांसी का 140 साल पुराना पारीछा बांध बना विश्व विरासत, अक्टूबर में फ्रांस में मिलेगा अंतरराष्ट्रीय सम्मान