रांची-हावड़ा वंदे भारत ने पूरा किया 6 लाख किमी का सफर, झांसी कोच फैक्ट्री में होगी मरम्मत
रांची-हावड़ा वंदे भारत ट्रेन 6 लाख किलोमीटर का सफर पूरा करने के बाद पहली बार मरम्मत के लिए झांसी पहुंचेगी। ...और पढ़ें

HighLights
रांची-हावड़ा वंदे भारत 6 लाख किमी बाद झांसी आएगी।
झांसी कारखाना करेगा ट्रेन की विस्तृत जांच और मरम्मत।
यह उपलब्धि रेल कोच नवीनीकरण कारखाने के लिए महत्वपूर्ण।
जागरण संवाददाता, झांसी। रेल कारखाने के लिए यह किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं है। देश की आधुनिक ट्रेन में शामिल दक्षिण रेलवे की रांची-हावड़ा वंदे भारत पहली बार मरम्मत के लिये झांसी पहुंचेगी। यहां कारखाने में ट्रेन की बोगी, व्हील और सस्पेंशन सिस्टम को अलग-अलग करके उनकी विस्तृत जांच और मरम्मत की जाएगी। इस महत्वपूर्ण कार्य को लेकर कारखाने के अधिकारी तैयारियों में जुट गए हैं।
15 फरवरी 2019 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रेल कोच नवीनीकरण कारखाना निर्माण की घोषणा की थी। इसके बाद 80 एकड़ जमीन पर लगभग 455 करोड़ रुपये की लागत से रेल कोच नवीनीकरण कारखाना बनाया गया। आरवीएनएल (रेल विकास निगम लिमिटेड) ने इस कारखाने का निर्माण किया है। मार्च 2024 में प्रधानमन्त्री ने इस कारखाने का वर्चुअल माध्यम से उद्घाटन किया था। इसके बाद से कारखाने में काम प्रारम्भ हो गया।
इस कारखाने में वंदे भारत के कोच की मरम्मत होने लगी है। यह झांसी कारखाने के साथ मंडल के लिए बड़ी उपलब्धि है कि पहली बार दक्षिण रेलवे की वंदे भारत मरम्मत के लिए झांसी कारखाने पहुंच रही है। दीपावली के बाद यह ट्रेन कारखाना पहुँचेगी। अधिकारियों के मुताबिक, अक्तूबर तक यह वंदे भारत 6 लाख की दूरी तय कर चुकी होगी, जिसके लिहाज से इसकी मरम्मत होगी।
आधुनिक मशीनरी और प्लांट से लैस होने लगा कारखाना
हाईटेक रेल कोच नवीनीकरण कारखाना आधुनिक मशीनरी और प्लांट से लैस होने लगा है। रोबोटिक आर्म पेण्ट मशीन, शॉट ब्लास्टिंग प्लांट, बोगी असेम्बलिंग में ऑटोमेशन और रिमोट कण्ट्रोल से लैस ईओटी क्रेन शामिल हैं। इनमें अब सबसे खास रोबोटिक मशीन है। यह एलबीएच कोच से लेकर वंदे भारत के कोच को पेण्ट करेगा। अभी तक ट्रेन में कोच की पेण्टिंग मैनुअल होती थी। इसमें तो समय लगता ही था, गुणवत्ता नहीं दिखती थी।
7.10 घण्टे में करती है 462 किलोमीटर की दूरी तय
रांची से हावड़ा के बीच वाली वंदे भारत वर्ष 2023 से संचालित हो रही है। यह ट्रेन रांची से हावड़ा तक 462 किलोमीटर का सफर तय करती है। ट्रेन सप्ताह में 6 दिन चलती है। मंगलवार को इसका संचालन नहीं होता है।
यह है वंदे भारत की खासियत
यह ट्रेन पूरी तरह से बिजली से चलती है। इस ट्रेन में इंजन की बजाय बिजली के मोटर लगाए गए हैं। ट्रेन 100 किलोमीटर की स्पीड महज 52 सेकेण्ड में पकड़ लेती है। ट्रेन में ऑटोमेटिक दरवाजे लगे हैं। मेट्रो ट्रेन के जैसे ही इसके दरवाजे ऑटोमेटिक खुलते हैं। इस ट्रेन में 4 डिब्बों का एक सेट होता है।
एक डिब्बे में खराबी होने पर पूरा सेट बदलना होता है। इसमें लगे स्टिंग चेयर्स 360 डिग्री तक घूम जाती है। इस ट्रेन में कैटरिंग की सुविधा भी उपलब्ध है। यात्रियों की सुविधा का ध्यान रखते हुए ट्रेन को पूरी तरह से ऑनबोर्ड वाईफाई की सुविधा से लैस किया गया है।
हर सीट के नीचे मोबाइल और लैपटॉप चार्ज करने के लिए चार्जिंग प्वाइंट दिए गए हैं। वंदे भारत ट्रेन में जीपीएस प्रणाली लगी है। इसके जरिए आने वाले स्टेशन की सूचना और अन्य जानकारी मिलती रहती है। इसमें हवाई जहाज की तरह ही वैक्यूम टॉयलेट बनाए गए हैं। बाहर का नजारा अच्छी तरह से दिखाई दे, इसीलिए कोच में बड़े ग्लास लगाए गए हैं।
रेल कोच नवीनीकरण कारखाने में दक्षिण रेलवे की वंदे भारत का आना हम सभी के लिये बड़ी उपलब्धि है। इसके पहले कई वंदे भारत की इस कारखाने में मरम्मत की जा चुकी है।
-अतुल कनौजिया, मुख्य कारखाना प्रबन्धक, रेल कोच नवीनीकरण कारखाना, झांसी।
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