0 प्रयागराज में आई सबसे अधिक दर

0 ई-टेण्डर में ठेकेदारों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा से धड़ाम हुए रेट

0 मण्डलायुक्त की पहल पर जल संस्थान को एक फायदा

झाँसी : घोटाले के कलंक से उबर रहे जल संस्थान में अब जीआइ पाइप के रेट भी धड़ाम हो गए हैं। इस बार झाँसी जल संस्थान प्रदेश में सबसे कम दरों पर पाइप खरीदेगा, जबकि प्रयागराज की दरें सबसे अधिक आई हैं। लखनऊ से तुलना करें तो झाँसी में 23 ह़जार रुपए प्रति मीट्रिक टन कम दर पर पाइप खरीदा जाएगा। इस खेल पर विराम लगाने में भी मण्डलायुक्त की अहम भूमिका रही है, जिन्होंने ई-टेण्डर के बावजूद ठेकेदारों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा कराने में सफलता प्राप्त की।

सामग्री ख़्ारीद से लेकर पाइप लाइन मरम्मत के कार्य में 500 करोड़ रुपए के घोटाले में विजिलेंस जाँच का सामना कर रहे जल संस्थान में अब सुधार की बयार चल रही है। मण्डलायुक्त डॉ. अजय शंकर पाण्डेय के पदभार सँभालने के बाद जब जल संस्थान का काला चिट्ठा उनके सामने खुला तो उन्होंने इसकी लगाम अपने हाथ में सँभाल ली। इसके बाद से ही जल संस्थान में होने वाले एक-एक खेल को पकड़ा और उसका स्थायी उपचार कर दिया। मण्डलायुक्त ने पहले ब्लीचिंग पाउडर में होने वाले खेल पर विराम लगाया तो फिर विभागीय देनदारियों का हिसाब करते हुए जल संस्थान को करोड़ों का लाभ कराया। अब जीआइ पाइप की खरीद पर शिकंजा कसा तो इसके रेट भी ़जमीन पर आ गए। दरअसल, जीआइ पाइप सप्लाई में ठेकेदारों का सिण्डीकेट काम करता था, जो टेण्डर पूल कराते हुए निविदाओं को हथिया लेता था और मनमाने रेट वसूलता था, लेकिन मण्डलायुक्त ने इस बार टेण्डर में कड़ी प्रतिस्पर्धा कराने के स्पष्ट निर्देश दिए। इसके बावजूद सिण्डीकेट ने टेण्डर में पूल का खेल कर दिया और रेट को नीचे नहीं आने दिया। मण्डलायुक्त ने सन्देह जताते हुए निविदाएं निरस्त कर दीं। इसके बाद दोबारा निविदाएं कराई, जिसके बाद जीआइ पाइप की दर 1,25,670 रुपए प्रति मीट्रिक टन आई। यह दर प्रदेश में सबसे कम है, जबकि लखनऊ में 1,48,528 रुपए रेट आए हैं तो प्रयागराज में 1,88,210 रुपए आए हैं, जो प्रदेश में सबसे अधिक हैं। मण्डलायुक्त के इस प्रयास से जल संस्थान को करोड़ों का लाभ होगा।

इन मामलों में भी मण्डलायुक्त ने कराया सुधार

0 मण्डलायुक्त ने जल संस्थान में खरीदे जा रहे ब्लीचिंग पाउडर की दरों में भी 7 ह़जार रुपए प्रति मीट्रिक टन की कमी कराई। अब यहाँ 21,260 रुपए प्रति एमटी की दर से ब्लीचिंग पाउडर खरीदा जा रहा है। यह दर भी प्रदेश में सबसे कम है।

0 जल संस्थान में ठेकेदारों की 24 करोड़ की देनदारियाँ थीं, लेकिन मण्डलायुक्त ने सभी पत्रावलियों की जाँच की और देनदारी को घटाकर 5 करोड़ रुपए तक ला दिया। इससे विभाग को 19 करोड़ की बचत हुई।

फाइल : राजेश शर्मा

Edited By: Jagran