0 आरसी के ख़्िाला़फ अपील के लिए तय नहीं हो पा रही अथॉरिटि

0 हाइकोर्ट ने स्थानीय स्तर पर अपील का दिया था सुझाव

0 जल संस्थान व जल निगम एक दूसरे के पाले में उछाल रहे गेन्द

झाँसी : बिना पानी लिए ही जल संस्थान के कर्जदार बन चुके व्यापारी अब जल संस्थान और जल निगम के बीच चकरघिन्नी बन गए हैं। हाइकोर्ट ने व्यापारियों को स्थानीय स्तर पर अपील करने का सुझाव व समय दिया था, लेकिन यहाँ स्थानीय अपील अथॉरिटि तय नहीं हो पा रही है, जिसके समक्ष व्यापारी अपना पक्ष प्रस्तुत कर सकें। जल संस्थान व जल निगम एक-दूसरे के पाले में गेन्द उछाल रहे हैं।

पिछले दिनों जल संस्थान ने महानगर के 150 से अधिक व्यापारियों के ख़्िाला़फ आरसी जारी कर दी थी। ऐसे व्यापारियों को भी नोटिस दिए गए थे, जो न जल संस्थान से नल का कनेक्शन लिए थे और न सरकारी तौर पर पानी का प्रयोग करते थे। इन व्यापारियों ने विरोध जताया तो जल संस्थान ने पाइप लाइन के 100 मीटर के दायरे में रहने वाले लोगों पर जलकर आरोपित करने का नियम आगे बढ़ा दिया। जनप्रतिनिधियों ने भी इस पर आपत्ति जताई तो व्यापारी संगठनों ने प्रदर्शन कर आन्दोलन की चेतावनी दी। पर, जल संस्थान ने वर्ष 1979 के गजट को आधार बनाते हुए नोटिस वापस लेने से इन्कार कर दिया। इसके बाद व्यापारियों ने न्यायालय में रिट दाखिल करने का निर्णय लिया। उधर, व्यापारी मुकेश गुप्ता की याचिका पर न्यायालय ने सुनवाई पूरी होने तक वसूली पर रोक लगा दी। इसके बाद 40 और व्यापारियों ने इलाहाबाद हाइकोर्ट में याचिका दाखिल कर दी। न्यायालय ने जल संस्थान के पक्ष को तो प्रभावी माना, लेकिन वसूली आरसी लॉ ऑफ लिमिटेशन (काल बाधित) है या नहीं, इसका निर्धारण करने के लिए व्यापारियों को स्थानीय अपील अथॉरिटि में जाने को कहा, जिसके लिए 15 सितम्बर तक का समय दिया गया। मुकेश गुप्ता के साथ आधा दर्जन व्यापारियों ने जल संस्थान में अपील की तो विभाग ने उप्र वॉटर सप्लाई एवं सीवरेज अधिनियम 1975 की धारा 30 का हवाला देकर सुनवाई के लिए जल निगम को अथॉरिटि बता दिया। व्यापारी जब जल निगम गए तो अधीक्षण अभियन्ता जल निगम राकेश कुमार ने 21 सितम्बर को पत्र लिखकर सुनवाई की गेन्द जल संस्थान के पाले में डाल दी। स्थानीय अपील अथॉरिटि तय नहीं होने से व्यापारी दोनों विभागों के बीच फुटबॉल बन गए हैं।

20 साल के थमाए हैं बिल

जल संस्थान ने व्यापारियों को एक साथ 20 साल के बिल थमाते हुए लाखों का बकाएदार बना दिया है। मुकेश गुप्ता ने बताया कि शासनादेश के अनुसार 3 साल से अधिक पुरानी वसूली नहीं की जा सकती है। हाइकोर्ट ने इसी का निर्धारण करने के लिए स्थानीय अपील अथॉरिटि में जाने के लिए कहा है, लेकिन यहाँ तय नहीं हो पा रहा है कि सुनवाई कौन करेगा?

फोटो हाफ कॉलम

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सुनवाई नहीं हुई तो न्यायालय की अवमानना का नोटिस देंगे : मुकेश

व्यापारियों की लड़ाई लड़ रहे मुकेश गुप्ता ने बताया कि हाइकोर्ट ने स्थानीय अपील अथॉरिटि में अपना पक्ष रखने को कहा था, लेकिन जल संस्थान व जल निगम एक-दूसरे के पाले में गेन्द डाल रहे हैं। यदि निर्धारित समय पर विभाग सुनवाई नहीं करता है तो न्यायालय की अवमानना होगी, जिसके लिए एक बार फिर न्यायालय की शरण ली जाएगी।

फाइल : राजेश शर्मा

Edited By: Jagran