0 जनपद में हर माह 32 करोड़ रुपए की शराब पी जाते हैं लोग

0 दुर्गा नवमी में विभाग की 4.5 करोड़ की कम हुयी बिक्री

झाँसी : शराब का नशा सिर चढ़कर बोलता है। लेकिन जब मामला धर्म और आस्था का आ जाता है तब यह बौना साबित हो जाता है। वैसे तो शहर में शराब के शौकीनों की कोई कमी नहीं, लेकिन नवरात्र का पर्व आते ही श्रद्धालु शराब को त्याग देते हैं। इन 9 दिनों में लगभग 4.5 करोड़ रुपए की बिक्री कम हुयी।

जनपद के लोग हर महीने लगभग 32 करोड़ रुपए की शराब पी जाते हैं। इसमें सबसे अधिक देशी शराब बिकती है। दूसरे नम्बर पर अंग्रे़जी और तीसरे नम्बर पर बीयर के शौकीन हैं। आबकारी विभाग को हर साल लक्ष्य मिलता है। इस साल 7 लाख बल्क लिटर का लक्ष्य मिला है। विभाग साल भर प्रवर्तन की कार्यवाही कर इस लक्ष्य को पार कर राजस्व में बढ़ोत्तरी करता चला आ रहा है। नवरात्र में अधिकांश शौकीन शराब के नशे को छोड़ माँ की भक्ति में लीन हो जाते हैं। इस साल दुर्गा नवमी के पहले दिन से ही शराब की दुकानों पर सन्नाटा पसर गया। अन्य दिनों की तुलना में आधे ही ग्राहक पहुँचे।

देशी शराब के शौकीन अधिक

जनपद में शराब की कुल 424 दुकानें हैं। इसमें देशी की 269, अंग्रे़जी की 84, बीयर की 71 व 5 मॉडल शॉप हैं। इसमें सबसे अधिक बिक्री देशी शराब की होती है। इससे प्रतिमाह लगभग 19 करोड़ रुपए का राजस्व मिलता है, तो अंग्रे़जी से लगभग 9 करोड़ और बीयर से लगभग 4 करोड़ के आसपास राजस्व मिलता है। यानी, प्रतिदिन लगभग सवा करोड़ रुपए की शराब बिकती है।

ग्रामीणों से दोगुना शराब पी जाते हैं शहर वाले

जनपद की आबादी 22 लाख के आसपास है। नगर निगम क्षेत्र में 5 लाख से अधिक लोग रहते हैं। महानगर की आबादी ग्रामीण क्षेत्र से लगभग चौथाई है। शराब की बिक्री के आँकड़ों पर ऩजर डालें तो शहर क्षेत्र में 65 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्र में 35 फीसदी शराब की बिक्री होती है। यानी, शहर के लोग ग्रामीणों से दो गुना अधिक शराब पी जाते हैं।

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इन्होंने कहा

'नवरात्र, पितृ पक्ष, गणेश चतुर्थी, रमजान पर्व के दौरान हर साल शराब की बिक्री कम हो जाती है। इसके अनुसार ही लक्ष्य तय किया जाता है। नवरात्र के 9 दिनों में करीब 4.5 करोड़ की बिक्री कम हुयी है। विभाग लगातार प्रवर्तन की कार्यवाही कर रहा है, जिससे हर साल लक्ष्य को पूरा कर लिया जाता है।'

प्रमोद कुमार गोयल

़िजला आबकारी अधिकारी

14 इरशाद-1

समय : 6.45 बजे

Edited By: Jagran