- एक ह़जार से अधिक प्रवेश की सीट कम हुई

- अनुदेशकों की नौकरी पर संकट के बादल

झाँसी : वैश्रि्वक महामारी कोरोना के कारण प्रदेश के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आइटीआइ) में तीसरी पाली को बन्द कर देने से स्टाफ की नौकरी तथा संस्थानों पर वित्तीय संकट के बादल मँडराने लगे हैं।

प्रशिक्षण एवं सेवायोजन उप्र, लखनऊ के निदेशक कुणाल सिल्कू ने प्रदेश के ह़जारों आइटीआइ में संचालित तीसरी शिफ्ट में सत्र 2021 में प्रवेश नहीं करने के आदेश अधिशासी निदेशक राज्य व्यवसायिक प्रशिक्षण परिषद अलीगंज तथा समस्त नोडल प्रधानाचार्य को जारी किए हैं। इससे निजी संस्थानों के संचालकों में अफरा-तफरी की स्थिति है। प्रदेश में राजकीय एवं निजी आइटीआइ में विभिन्न रो़जगारपरक व्यवसाय में लाखों छात्र टेक्निकल एजुकेशन की ट्रेनिंग ले रहे हैं। राजकीय संस्थानों में 2 पाली तथा निजी संस्थानों में 3 पाली में सुबह 6 बजे से रात्रि 7 बजे तक प्रशिक्षण दिया जाता है। निजी संस्थानों पर आरोप लगते रहते हैं कि अधिकतर संस्थान 5 बजे तक ही बच्चों को ट्रेनिंग देते हैं। सूत्रों का मानना है कि तीसरी शिफ्ट व्यवहारिक रूप में सफल नहीं हो पाने तथा कोरोना के कारण शासन ने इसे बन्द करने का निर्णय लिया है। जानकारों का कहना है कि निजी प्रशिक्षण संस्थानों को वर्कशॉप के लिए कोई अतिरिक्त उपकरण नहीं लेने के कारण अधिकाश संस्थानों ने तीसरी पाली में प्रशिक्षण देने की अनुमति प्राप्त कर ली। बिना किसी अतिरिक्त खर्च के लाखों की कमाई होने से निजी क्षेत्र के संस्थानों ने ही तीसरी पाली की अनुमति ली, उन्हें ही यह तीसरी पाली रास आई। जनपद में राजकीय आइटीआइ झाँसी, विश्व बैंक महिला आइटीआइ (झाँसी), उल्दन एवं मऊरानीपुर में राजकीय आइटीआइ संचालित की जा रही हैं। इसके अलावा निजी क्षेत्र में लगभग 3 दर्जन आइटीआइ में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रत्येक यूनिट में 20 छात्रों को प्रवेश दिया जाता है। सूत्रों का दावा है कि तीसरी पाली बन्द करने से एक ह़जार से अधिक बच्चे प्रवेश से वंचित रह जाएंगे।

Edited By: Jagran