लोगो : जागो मतदाता जागो

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नागर हवेली में नए मतदाता अधिक बढ़े

पहली बार वोट देने जा रहे मतदाताओं की संख्या देशभर में बढ़ी है। सबसे अधिक (9.9 प्रतिशत) नये मतदाता केन्द्र शासित प्रदेश दादरा और नागर हवेली में बढ़े हैं, जिनकी उम्र 18 से 19 वर्ष है। झारखण्ड में 9 प्रतिशत बढ़ी है, जबकि दमन और दीव में मतदाताओं की संख्या 8.6 बढ़ी है। सबसे कम बढ़ोत्तरी की दर (1.1 प्रतिशत) अण्डमान निकोबार में देखी गई। हिमाचल प्रदेश में 1.3 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश में 2.4 प्रतिशत और बिहार में मतदाओं की संख्या 2.7 प्रतिशत तक बढ़ी है।

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लोगो : जागरण इन्फो

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पण्डित गुरुदत्त विद्यार्थी की जन्म तिथि आज

आर्य समाज द्वारा संचालित डीएवी विद्यालयों की स्थापना में महात्मा हंसराज और पण्डित गुरुदत्त विद्यार्थी का विशेष योगदान रहा है। गुरुदत्त जी का जन्म 26 अप्रैल 1864 को मुल्तान (वर्तमान पाकिस्तान) में लाला रामकृष्ण के घर पर हुआ था। गुरुदत्त ने प्रारम्भिक शिक्षा मुल्तान में प्राप्त की और इसके बाद लाहौर आ गये। यहाँ हंसराज और लाला लाजपत राय भी पढ़ रहे थे। यहाँ तीनों की आपस में बहुत घनिष्ठता हो गई। गुरुदत्त को विज्ञान में रुचि थी, इसके कारण वे हर चीज को विज्ञान की कसौटी पर कस कर देखते थे। उनके इस स्वभाव के कारण उनका व्यवहार नास्तिक हो गया। कुछ समय बाद वे आर्य समाज के सम्पर्क में आये। समाज के उद्देश्य और ज्ञान का अध्ययन करने के बाद वे आस्तिक हो गये। 1883 में जब दयानन्द जी बीमार थे, तो लाहौर से दो लोगों को उनकी सेवा के लिये भेजा गया, जिसमें से एक गुरुदत्त भी थे। दयानन्द जी के देहान्त के बाद गुरुदत्त ने उनकी स्मृति में 'दयानन्द एंग्लो वैदिक कॉलेज' का स्थापना का प्रस्ताव रखा। इसका उपस्थित सभी लोगों ने समर्थन किया और उसी समय 8 ह़जार रुपये एकत्र भी हो गये। इस विद्यालय के कार्य के लिये गुरुदत्त ने देश के कई भागों में सभाएं की और वैदिक ज्ञान के साथ अंग्रेजी के ज्ञान की महत्ता भी बताई। उनके इस काम में लाला लाजपत राय भी शामिल हो गये। लाजपत के जोशीले भाषण और गुरुदत्त की अपील से 3 साल में 20 ह़जार ऩकद और 44 ह़जार रुपये के आश्वासन उन्हें मिले। अन्त में 1 जून 1886 को लाहौर में डीएवी स्कूल की स्थापना हो गई। हंसराज इस विद्यालय के प्रथम प्राचार्य हुए। इसी वर्ष पण्डित गुरुदत्त ने विज्ञान से एमए किया तथा लाहौर के सरकारी विद्यालय में प्राध्यापक हो गये। यह स्थान पाने वाले गुरुदत्त पहले भारतीय थे। गुरुदत्त जी के दो अंग्रेजी लेख 'वैदिक संज्ञा विज्ञान' तथा 'वैदिक संज्ञा विज्ञान व यूरोप के विद्वान' को ऑक्सफर्ड विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया। क्षय रोग के कारण 19 मार्च 1890 को महज 26 वर्ष की आयु में उनका देहान्त हो गया।

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लोगो : बातें विज्ञान की

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नाखून काटते हुए महिला की फोटो

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नाखून काटने पर दर्द क्यों नहीं होता है?

प्रत्येक जीव में नाखून किरेटिन नामक पदार्थ से बनते हैं, जो एक प्रकार का निर्जीव प्रोटीन होता है। हमारे शरीर में नाखूनों का आधार उंगली की त्वचा के अन्दर होता है। वास्तव में नाखून के अन्दर की त्वचा शरीर के अन्दर होती है। लेकिन इसके अन्दर लचीले रेशे होते हैं, जिनमें नाखून काटने पर जरा-सा भी घाव नहीं होता है। इसी कारण से नाखून काटते समय हमें दर्द नहीं होता है।

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आज का इतिहास

0 2010 में बिहार सरकार ने बिहार के प्रसिद्ध 'चिनिया' केले की ब्रैण्डिंग 'गंगा' केले के रूप में करने का फैसला किया।

0 2010 में आइपीएल गवर्निग काउंसिल की मीटिंग के बाद चिरायु की नए अन्तरिम कमिश्नर के तौर पर नियुक्त की गई।

फाइल : शिखा पोरवाल

समय : 5.00

25 अप्रैल 2014