जागरण संवाददाता, जौनपुर: लोकसभा चुनाव में बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम जोड़े तो गए, लेकिन अभी तक उन्हें वोटरआइडी नहीं मिल सकी है। वोट करवाने को मतदाताओं का नाम वोटर लिस्ट में जोड़ तो दिया गया, लेकिन पहचान पत्र अभी तक नहीं मिल सका है। नए ही नहीं, बल्कि नामों को संशोधित करने वालों को भी वोटर कार्ड का इंतजार है। बताया जा रहा है कि चेन्नई की एक कंपनी को कार्ड बनाने का कान्ट्रैक्ट दिया गया है, जिसकी ओर से ढि़लाई की जा रही है।

लोकसभा चुनाव के दौरान जिला निर्वाचन कार्यालय की ओर से अभियान चलाकर बड़े पैमाने पर मतदाता सूची में नाम जोड़ा। इस दौरान जहां 65 हजार बोगस मतदाताओं के नाम काटे गए, वहीं तकरीबन सवा लाख नए मतदाताओं का नाम सूची में जोड़ा। इसके अलावा भारी संख्या में नामों का संशोधन भी किया गया। वोटर लिस्ट में नाम दर्ज होने के आधार पर मतदाताओं ने वोट तो दे दिया, लेकिन अभी तक उन्हें वोटर आईडी कार्ड नहीं मिल सका है। दलील दी जा रही है कि चेन्नई स्थित कंपनी को कार्ड बनाने का जिम्मा दिया गया, जो अभी तक कार्ड उपलब्ध नहीं करा सकी है। उधर वोटर आईडी कार्ड नहीं मिल पाने से तमाम लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कुल मिलाकर तकरीबन डेढ़ लाख लोग हैं, जिनका नाम मतदाता सूची में नाम दर्ज होने के बाद भी वोटर आईडी कार्ड का इंतजार है।

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वोटर आईडी कार्ड की मानीटरिग चुनाव आयोग द्वारा की जाती है। जिनका नाम सूची में दर्ज है, उन्हें पहचान पत्र भी जरूर मिलेगा। यह जैसे ही प्राप्त होगा प्राथमिकता के आधार पर लोगों तक पहुंचवाया जाएगा।

अरविद मलप्पा बंगारी, डीएम

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Posted By: Jagran

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