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वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के कुलपत‍ि बोले - एआइ से पूविवि में शिक्षा से सुशासन तक बदलाव की तैयारी

By khalid shah Edited By: Abhishek sharma
Published: Sun, 13 Sep 2026 06:46 PM (IST)

वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार, स्वास्थ्य और सुशासन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआइ) को एकीकृत करने की ...और पढ़ें

एआइ से पूर्वांचल विश्वविद्यालय में शिक्षा से सुशासन तक आएगा बदलाव।

एआइ से पूर्वांचल विश्वविद्यालय में शिक्षा से सुशासन तक आएगा बदलाव।

HighLights

  1. पूर्वांचल विश्वविद्यालय में एआइ से शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार में बदलाव।

  2. कुलपति प्रो. राकेश कुमार सिंह ने एआइ के उपयोग की जानकारी दी।

  3. छात्रों की सुविधा, सुरक्षा, समग्र विकास पर विशेष ध्यान।

जागरण संवाददाता, मल्हनी (जौनपुर)। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआइ) के माध्यम से शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के साथ स्वास्थ्य एवं सुशासन के क्षेत्र में नई दिशा देने की तैयारी है। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर में आयोजित कृत्रिम बुद्धिमत्ता मंथन-2.0 में विश्वविद्यालय का विजन प्रस्तुत करने के बाद कुलपति प्रो. राकेश कुमार सिंह ने इसकी जानकारी साझा की।

कुलपति प्रो. राकेश कुमार सिंह ने कहा कि “एआइ को केवल तकनीक के रूप में नहीं, बल्कि शिक्षा, अनुसंधान और विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने के माध्यम के रूप में अपनाया जाएगा। हमारा प्रयास है कि इसका लाभ कक्षा से लेकर शोध और प्रशासन तक विद्यार्थियों को दिखाई दे।” उन्होंने कहा कि “तकनीक के साथ विद्यार्थियों की सुविधाएं, सुरक्षा और उनका समग्र विकास भी हमारी प्राथमिकता है।”

उन्होंने बताया कि कुलाधिपति एवं राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल के समक्ष विश्वविद्यालय की उपलब्धियों और भविष्य की कार्ययोजना का प्रस्तुतिकरण किया गया। इसमें शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार, स्वास्थ्य और सुशासन में एआइ के उपयोग की संभावनाओं पर चर्चा हुई।प्रो. राकेश सिंह ने कहा कि “विश्वविद्यालय में एआइ के उपयोग को केवल तकनीकी प्रयोग तक सीमित नहीं रखा जाएगा। इसका इस्तेमाल बेहतर निर्णय, पारदर्शी प्रशासन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए किया जाएगा।”

विद्यार्थियों की सुविधाओं के लिए छात्रावासों के विस्तार, खेलकूद गतिविधियों को बढ़ावा देने, इंटरनेट सुविधाओं को मजबूत करने और छात्र सुरक्षा से जुड़ी पहलों पर भी काम किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि “विश्वविद्यालय का विकास तभी सार्थक है, जब तकनीकी प्रगति के साथ सामाजिक जिम्मेदारी भी मजबूत हो।”

इसी दृष्टि से क्षय रोगियों के सहयोग एवं जागरूकता, किशोरियों के लिए मानव पेपिलोमा विषाणु (एचपीवी) टीकाकरण, सौ सप्ताह के नशामुक्ति अभियान, सेवा पखवाड़ा और बाल संरक्षण गृह से संबंधित कार्ययोजना को भी प्रस्तुतिकरण में शामिल किया गया। कृत्रिम बुद्धिमत्ता मंथन-2.0 में विभिन्न विश्वविद्यालयों के शिक्षाविदों, विशेषज्ञों और प्रतिनिधियों ने एआइ के माध्यम से उच्च शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार, स्वास्थ्य और सुशासन को नई दिशा देने पर विचार साझा किए।विश्वविद्यालय की टीम में कुलपति के नेतृत्व में कुलसचिव डॉ. विनोद कुमार सिंह, आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ के समन्वयक प्रो. गिरिधर मिश्र, प्रो. सौरभ पाल, डॉ. विक्रान्त भटेजा, डॉ. सुनील यादव और दिलीप कुमार यादव शामिल रहे।