जागरण संवाददाता, जौनपुर: ग्राम पंचायत अधिकारी/ग्राम विकास अधिकारी समन्वय समिति के बैनर तले ग्राम पंचायतों में तैनात सचिवों ने कलेक्ट्रेट परिसर में धरना-प्रदर्शन कर अपना उत्पीड़न किए जाने का आरोप लगाया। सचिवों के इस विरोध प्रदर्शन के समर्थन में ग्राम प्रधानों ने भी जिला प्रशासन द्वारा जांच के नाम पर की जा रही कार्रवाई को गलत बताते हुए कहा कि इसमें शासनादेश एवं पंचायती राज एक्ट के प्राविधानों का पालन नहीं किया जा रहा है। संगठन में जिले में कार्यरत सभी 188 सचिवों ने जिलाधिकारी से अपने सामूहिक निलंबन की मांग की।

समन्वय समिति के संयोजक डा.फूलचंद कनौजिया व डा.प्रदीप कुमार सिंह ने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा विकास खंडों में बिना स्पष्टीकरण एवं उचित कारण के निलंबन एवं प्राथमिकी दर्ज किए जाने की अविधिक कार्रवाई करके दहशत का वातावरण बनाया जा रहा है। 14 वें राज्य वित्त की धनराशि में हुई बिना कार्य योजना में फीडिग एवं गाइड लाइन से विपरीत कार्य करने हेतु निर्देश दिया जा रहा है। इस चेतावनी सभा में वक्ताओं ने सचिवों का निलंबन व उनके विरुद्ध दर्ज प्राथमिकी तत्काल वापस लिए जाने, सामूहिक अवकाश पर रहे तीनों दिन की वेतन कटौती का आदेश निरस्त किए जाने, ग्राम पंचायतों में सचिव एवं प्रधानों को पीएफएसएस डोंगल प्रणाली का प्रशिक्षण दिए जाने आदि की मांग की गई। इसके अलावा उच्चाधिकारियों द्वारा संबंधित कर्मचारी का पक्ष सुनने के बाद ही कोई कार्रवाई किए जाने, बेसहारा पशुओं को पकड़ने के लिए सचिवों एवं सफाई कर्मी पर दबाव न बनाकर पशु धन विभाग से प्रशिक्षित टीम को लगाए जाने की मांग की गई। वक्ताओं ने मध्य सत्र में सचिवों के तबादले एवं ग्राम पंचायतों के आवंटन पर तत्काल रोक लगाए जाने, दबाव व पूर्वांग्रह से ग्रसित होकर की गई जांचों पर रोक लगाए जाने की मांग की। इस मौके पर रामकृष्ण पाल, विजय भान यादव, रणजीत सिंह, रमेश कुमार गौतम, मोहम्मद शाहिद, संजीव गुप्ता, गनेश गौड़, सुनील श्रीवास्तव, देवेंद्र सिंह आदि ने जिला प्रशासन को दस सूत्रीय मांग पत्र सौंपा।

Posted By: Jagran

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