जागरण संवाददाता, केराकत (जौनपुर): केराकत क्षेत्र में आज भी ज्वलंत समस्याओं के अंबार तले लोग कराहते हुए नजर आ रहे हैं। आजादी के बाद से आज भी कुछ ऐसी महत्वपूर्ण समस्याएं हैं जिन्हें लेकर समाधान कराने के हसीन सपने दिखाकर जनता के कीमती वोटों से अपनी खाली झोलियां भरने के बाद भूल जाना ही जनप्रतिनिधियों की नीयति ही बन चुकी है।

देखा जाए तो जौनपुर-गाजीपुर मार्ग पर पूर्वी छोर पर 30 किमी पर बसे केराकत तहसील मुख्यालय से आने जाने हेतु राजकीय यातायात साधन का घोर अभाव है। यही नहीं वर्ष 1903 में अंग्रेजी हुकूमत के दौरान जौनपुर-औड़िहार रेल लाइन का निर्माण किया गया था और केराकत को स्टेशन का दर्जा मिला था। इस रेल मार्ग का अमान परिवर्तन तो किया गया ¨कतु केराकत से स्टेशन का दर्जा छीन लिया गया। इस मार्ग पर मुफ्तीगंज व डोभी को स्टेशन का दर्जा मिल गया। आज देखा जाए तो केराकत में एक पैसेंजर व एक डेमू ट्रेन के साथ-साथ लंबी दूरी की संचालित ट्रेनों में सिर्फ गोदिया ट्रेन को छोड़ किसी भी ट्रेन का ठहराव सुनिश्चित नहीं हो सका। जनप्रतिधि सिर्फ झूठ बोलकर जनता से वादे-दर-वादे करते हुए बड़ी-बड़ी रेल यातायात-रेल यात्री सुविधाएं शीघ्र उपलब्ध करवाने के आश्वासन का घूंट पिलाते चले आ रहे हैं। संवरने के बजाए बदरंग होने लगी स्टेशनों की सूरत

जौनपुर-औड़िहार रेलमार्ग पर स्थित यादवेंद्र नगर, मुफ्तीगंज, गंगौली, केराकत, डोभी व दुधौड़ा(पतरहीं) स्टेशनों की दशा पर नजर डाली जाए तो संवरने को कौन कहे दिनोंदिन बद से बदतर स्थिति नजर आने लगी है। इन स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं का घोर अभाव है। अधिकांश लाइटें जलती नहीं हैं। एक दो को छोड़कर अधिकांश हैंडपंप बिगड़े पड़े हैं। यात्रियों को बैठने के लिए बेंच टूट चुकी हैं। शौचालयों की स्थिति अत्यन्त खराब है। स्टेशनों पर कूड़ों व घास-फूस झाड़ झंखाड़ का अंबार लगा हुआ है। बेकार पड़ी है बेरोजगारों की लंबी फौज

यहां शिक्षित बेरोजगारों की फौज तैयार हो चुकी है। ¨कतु काम के अभाव में हजारों नौजवान देश के बड़े महानगरों व विदेशों में नौकरी की तलाश में दर-दर की ठोकरें खाने पर विवश हैं। यहां एक भी कलकारखाना नहीं है। जिससे बेरोजगार युवक जुड़कर अपना जीवकोपार्जन कर सकें। बिजली की दु‌र्व्यवस्था का यह आलम है कि समुचित बिजली की आपूर्ति के अभाव में छोटे मझोले उद्योग धंधे दम तोड़ते नजर आ रहे हैं। व्यापार पर भी बुरा असर पड़ा है।

नगर में एक अर्से से राजकीय महिला डिग्री कालेज की मांग आज तक पूरी नहीं हो सकी। क्षेत्र के प्रमुख बाजारों में जल निकासी की समस्या नाली के अभाव में बनी हुई है। यही नहीं पेयजल संकट के निराकरण हेतु पानी टंकी की मांग पूरी नहीं हो सकी है। तहसील के मुफ्तीगंज के मई-पसेवां घाट व बीरमपुर-भड़ेहरी घाट पर निर्माणाधीन पक्का पुल काफी दिनों से धनाभाव के चलते ठप है। केराकत के सरोज बड़ेवर व गुलरा गाट पर पीपे पुल की मांग आज भी पूरी नहीं हो सकी। तहसील मुख्यालय पर मुंसिफ न्यायालय की मांग न जाने कब पूरी होगी। क्या कहते हैं सांसद

मछलीशहर सांसद राम चरित्र निषाद का कहना है कि केराकत में ¨सगल रेल लाइन होने के कारण इसे स्टेशन का दर्जा दिलाने में बड़ी बाधा है। यही नहीं लंबी दूरी के ट्रेनों का ठहराव एवं अन्य यात्री सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। ¨कतु डबल रेल लाइन का कार्य चल रहा है। इसके पूर्ण होने में कुछ माह में लगेंगे। कार्य पूर्ण होते ही स्टेशन का दर्जा व अन्य ट्रेनों का ठहराव आदि सुविधाएं शीघ्र उपलब्ध करा दी जाएंगी। उन्होंने कहा कि डोभी में कई महत्वपूर्ण ट्रेनों का ठहराव करवा दिया गया है। केराकत क्षेत्र प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़कों का निर्माण चंदवक व केराकत में आधुनिक शौचालय का निर्माण कराया गया है। सभी प्रमुख स्थानों पर पानी की टंकी निर्माण, सैकड़ों सौर उर्जा की लाइटों के अलावा केंद्र सरकार की कई महत्वपूर्ण कल्याणकारी योजनाओं को सीधे जनता तक लाभ पहुंचाने का कार्य सम्पन्न कराया गया है। साथ ही किसानों की नेशनल हाइवे में अधिग्रहीत जमीनों का चार गुना मुआवजा भी दिलाने का सफल प्रयास किया है। क्या कहते हैं विधायक

क्षेत्रीय विधायक दिनेश चौधरी ने कहा कि महिला डिग्री कालेज, केराकत में रोडवेज बस डिपो, केराकत नगर के सुंदरीकरण व चौराहों पर महापुरुषों के प्रतिमाओं की स्थापना व सुंदरीकरण, पेयजल संकट के निराकरण हेतु पानी की टंकी, बाजारों में जलनिकासी की व्यवस्था, गोमती तट के पास एक सुंदर पार्क का निर्माण व क्षेत्र में एक स्टेडियम के साथ-साथ केराकत में मुंसफ कोर्ट की स्थापना जैसी समस्याओं का हल शीघ्र होगा।

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