पूर्वांचल विश्वविद्यालय में शिक्षकों को मिला लक्ष्य, तीन से छह माह में दिखाना होगा काम का परिणाम
वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में अब प्रत्येक विभाग के शिक्षकों को अपनी विशेषज्ञता के अनुसार स्पष्ट लक्ष्य तय कर ...और पढ़ें

पूर्वांचल विश्वविद्यालय में शिक्षकों को मिला 3-6 माह का लक्ष्य, शोध और गुणवत्ता पर जोर।
HighLights
शिक्षकों को 3-6 माह में परिणाम दिखाने के लिए स्पष्ट लक्ष्य।
शैक्षणिक गुणवत्ता, शोध, प्रकाशन और पेटेंट पर विशेष ध्यान केंद्रित।
प्रयोगशालाओं के विकास और संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।
जागरण संवाददाता, मल्हनी (जौनपुर)। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में अब प्रत्येक विभाग के शिक्षकों को अपने विभाग की जरूरत और विशेषज्ञता के अनुसार स्पष्ट लक्ष्य तय कर काम करना होगा। कुलपति प्रो. राकेश कुमार सिंह ने सभी विभागाध्यक्षों और शिक्षकों से तीन से छह माह की कार्ययोजना तैयार करने को कहा है।
इसमें विभाग की शैक्षणिक गुणवत्ता, शोध, प्रकाशन, पेटेंट, परियोजनाओं और प्रयोगशालाओं के विकास को प्राथमिकता देने के साथ यह भी बताना होगा कि निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने में विश्वविद्यालय प्रशासन से किस सहयोग की आवश्यकता है। विभागों को शोध कार्यों को बढ़ाने के साथ गुणवत्तापूर्ण शोधपत्रों के प्रकाशन और पेटेंट की दिशा में काम करने का लक्ष्य दिया गया है। प्रत्येक विभाग को नए शोध प्रोजेक्ट लाने के लिए भी प्रयास करना होगा।
शिक्षकों से कहा गया है कि वे अपनी विशेषज्ञता और विभाग की क्षमता के अनुरूप ऐसी परियोजनाओं पर काम करें, जिनसे विद्यार्थियों को शोध का व्यावहारिक अवसर मिल सके और विभाग की अकादमिक पहचान मजबूत हो।प्रयोगशालाओं को भी कार्ययोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। जहां लैब में सुधार की आवश्यकता है, वहां आवश्यक मरम्मत और सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। जिन प्रयोगशालाओं में उपकरणों या अन्य संसाधनों की कमी है, उनकी जरूरत चिह्नित कर सामान उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी।
जहां किसी सुविधा को विकसित करने की आवश्यकता है, वहां उसे भी प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जाएगा। हालांकि केवल नई लैब बनाने के बजाय पहले से उपलब्ध प्रयोगशालाओं को उपयोगी और संसाधनयुक्त बनाने पर जोर रहेगा। उद्देश्य यह है कि विद्यार्थियों को प्रयोगात्मक अध्ययन और शोध के दौरान किसी आवश्यक सुविधा की कमी का सामना न करना पड़े।
तीन माह में पूरे किए जा सकने वाले कार्यों को प्राथमिकता के साथ तय किया जाएगा, जबकि छह माह में पूरे होने वाले कार्यों के लिए विस्तृत लक्ष्य निर्धारित होंगे। प्रत्येक विभाग को यह भी बताना होगा कि उसके लक्ष्य की दिशा में अब तक क्या स्थिति है और आगे क्या किया जाना है। प्रशासन आवश्यक संसाधन, तकनीकी सुविधा, उपकरण और अन्य सहयोग उपलब्ध कराने पर काम करेगा।
हर विभाग अपनी विशेषज्ञता के अनुसार शोध, गुणवत्तापूर्ण प्रकाशन, पेटेंट और नए प्रोजेक्ट पर ठोस काम करे। प्रयोगशालाओं में जहां सुधार की जरूरत है, उसे दूर किया जाएगा और आवश्यक उपकरण व संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे। हमारा उद्देश्य है कि विद्यार्थियों को पढ़ाई, प्रयोग और शोध में किसी प्रकार की कमी न हो तथा शिक्षकों को अपनी क्षमता के अनुरूप परिणाम देने का पूरा अवसर मिले।
