जौनपुर, जागरण संवाददाता। समाज को बांटने की नापाक कोशिश हमेशा से होती रही है, लेकिन कुछ ऐसा जुड़ाव भी आपस में रहा है कि प्रेम और सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश करने वाले नाकाम रहे। कुछ ऐसा ही है शाहगंज नगर में। यहां विजय दशमी मेले के लिए रावण का पुतला चार पीढ़ियों से क्षेत्र के भादी निवासी मुस्लिम परिवार सुब्बन खां का कुनबा बनाता है। इस काम में परिवार के एक नहीं सभी सदस्य हाथ बंटाते हैं। इस साल इनके हाथ का बना 75 फीट ऊंचा रावण का पुतला मेले के आकर्षण का केंद्र होगा।

शाहगंज नगर में 153 वर्ष पूर्व जब रामलीला व विजय दशमी मेले की शुरुआत हुई तभी से रावण सहित राजा दशरथ का दीवान, मेघनाथ, सुपनखा, जटायु व हिरन आदि का पुतला बनाने का काम यह मुस्लिम परिवार करता चला आ रहा है। भादी निवासी 70 वर्षीय सुब्बन खां बताते हैं कि उनके पहले उनके पिता कौसर खान रावण के पुतले को बनाने की जिम्मेदारी निभाते रहे। उसके बाद यह काम मैं, मेरी पत्नी महजबी करती थी। आज पुत्री अफरीन, गुलसबा व पुत्र शाहनवाज व आकिब तथा शाहनवाज व आकिब के बच्चे भी कर रहे हैं। मैं भी साथ देता हूं। यह हमारी चौथी पीढ़ी है जो इस काम में लगी है। बताया कि पुतला बनाने के खर्च का जो रामलीला समिति के लोग दे देते हैं ले लेते हैं। हमारी कोई डिमांड नहीं होती। बताया कि सिर्फ इसलिए काम करते हैं कि यह हमारे पिताजी कर रहे थे।

नहीं होती कोई हिचक : यह परिवार पीढि़यों से बगैर किसी हिचक के हिंदुओं के प्रमुख पर्व विजय दशमी मेले में हिस्सा लेते चला आ रहा है। इनका यह काम गंगा-जमुनी तहजीब की एक जीता जागता मिसाल है और उनके लिए एक सबक भी है जो समाज को बांटने की सोचते हैं। सुब्बन बताते हैं कि इस बार 75 फीट ऊंचा रावण का पुतला बनाया जा रहा है। पुतले को बनाने में लोहे के रिंग का भी उपयोग हो रहा है, जो पुतले को मजबूती देगा और उसे खड़ा करने में भी मददगार होगा।

Edited By: Abhishek Sharma