जागरण संवाददाता ज्ञानपुर (भदोही) : किसी भी इंसान के जीवन में शिक्षा का अहम महत्व है। शिक्षा व्यक्ति के व्यक्तित्व व उसके अभिव्यक्ति का एक सशक्त माध्यम है। विभूति नारायण राजकीय इण्टर काले के प्रधानाचार्य प्रेम चंद्र यादव कहते हैं कि शिक्षा से परिपूर्ण व्यक्ति सभ्यता एवं संस्कृति के अनुसार ही अपना जीवन निर्वाह करता है। शिक्षा से संस्कार का व्यवहार में समावेश होता है। शिक्षा ही वह माध्यम है जिसके कारण इतने वैज्ञानिक विकास संभव हो पाया है कि हम अन्य ग्रहों तक की यात्रा करने में सफलता हासिल कर पाए हैं। आर्थिक जीवन का आधार भी शिक्षा ही है। शिक्षा के प्रकाश से संपूर्ण समाज चरित्र के माध्यम से प्रकाशित होता है। काशी नरेश महाविद्यालय के मध्यकालीन इतिहास विभाग की अध्यक्ष कामिनी वर्मा कहती हैं कि शिक्षा के द्वारा ही व्यक्ति परिवार, समाज, समुदाय और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों तथा अधिकारों से परिचित हो पाता है। शिक्षा ही वह माध्यम है जो एक उत्तरदायी नागरिक और सभ्य समाज का निर्माण करती है शिक्षा वास्तव में वह अछ्वूुत उपकरण हे जो व्यक्ति के आय स्तर और स्वास्थ्य में सुधार कर एक शसक्त व्यक्ति का निर्माण करती है। शिक्षा के कारण ही प्राचीन काल में भारत को विश्वगुरु की उपाधि से विभूषित किया गया है। शिक्षा से सबल प्रस्तुति का कोई अन्य माध्यम अभी तक समाज के सामने नहीं आया है। अन्त में हम सारांश रुप में कह सकते हैं कि शिक्षा के कारण ही हम जीव जगत में अन्य जीवों से अलग हैं। कानरा महाविद्यालय के प्राचीन इतिहास विभाग के अध्यक्ष डॉ जितेंद्र ¨सह नौलखा कहते हैं कि राष्ट्र की प्रगति और विकास सभी नागरिकों की शिक्षा के अधिकार की उपलब्धता पर निर्भर करता है। एक पाकिस्तानी स्कूल छात्रा मलाला यूसुफजई को शिक्षा के अधिकार के लिए तालिबान से धमकी मिली थी। तालिबान में उसके सिर पर गोली मार दी गई थी लेकिन इसके बाद भी जीवित रही और तब से वह मानव अधिकार, महिलाओं के अधिकार और शिक्षा के अधिकार के लिए एक वैश्विक पक्षधर बन गई है। वुडवर्ड पब्लिक स्कूल ¨प्रसिपल शालिनी मेहरा कहती हैं कि वर्तमान परिवेश में शिक्षा का महत्व बढ़ गया है। शिक्षा से जहां जीवन प्रकाशमय हो जाता है वहीं अशिक्षित व्यक्ति सब कुछ रहते हुए भी खुद को अंधकारमय स्थिति में पाता है। यही कारण है कि जागरूक अभिभावक अपने बच्चों को बेहतर से बेहतर शिक्षा दिलाने के लिए प्रयासरत रहते हैं। उन्हें यह पता है कि शिक्षा रूपी धन हासिल करने के लिए कड़े परिश्रम की जरूरत है लेकिन यह एक बार हासिल हो गई तो इसे न तो कोई छीन सकता है और न ही इसका महत्व कम हो सकता है। बल्कि यह कहा जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होगी कि इसका दायरा दिन ब दिन विस्तृत होता रहता है। शिक्षा सिर्फ नौकरी हासिल करने के लिए काम नहीं आती बल्कि शिक्षा से इंसान सोच विकसित होती है जो जीवन के कठिन राहों पर प्रकाश का काम करती है।

एमए समद इंटर कालेज ¨प्रसिपल रियासत अली का कहना है कि शिक्षा के बिना मनुष्य ठीक उसी तरह है जैसे नमक के बिना दाल। पेट भरने के लिए खाया जा सकता है लेकिन इससे तो स्वाद का पता चलता है न जायके का। यही वजह है कि शिक्षा को लेकर शासन, प्रशासन से लेकर अभिभावक तक गंभीर होते हैं। वे चाहते हैं कि उनके बच्चे उच्च शिक्षा हासिल कर जीवन में सफलता की बुलंदी तक पहुंचे। परिवार का एक सदस्य अगर शिक्षित हो गया तो अन्य सदस्यों को भी शिक्षित कर सकता है। इस सोच व भावना को जीवंत रखने के लिए ही आज हर व्यक्ति परेशान है। जिस प्रकार से सामाजिक परिवेश में बदलाव आ रहा है ऐसी स्थिति में शिक्षा और महत्वपूर्ण हो जाती है। पहले के दौर मे भले ही अशिक्षित लोगों को कम असुविधा होती थी लेकिन तकनीक के इस दौर में हर व्यक्ति का शिक्षित होना अत्यंत जरूरी है वर्ना उसे तमाम समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

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