जागरण संवाददाता, जौनपुर: आक्सीटोसिन इंजेक्शन का दुरुपयोग लगातार बढ़ता जा रहा है। पशुपालक जहां पशुओं से दूध निकालने में इसका उपयोग अवैध रूप से करते हैं वहीं फलों, सब्जियों की फसलों में भी इसका प्रयोग बेखौफ हो रहा है। इंजेक्शन लगे उत्पाद का सेवन करने से मानव व पशुओं के शरीर पर दुष्प्रभाव पड़ रहा है। इसे लेकर सरकार गंभीर है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, उद्यान व पशुपालन विभाग को संयुक्त टीम बनाकर कार्रवाई करने का आदेश दिया गया है। इतना ही नहीं जागरूकता के लिए इन तीन विभागों के अलावा कृषि विभाग को भी जिम्मेदारी दी जाएगी। इसके लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा।

प्रमुख सचिव भुवनेश कुमार ने गतदिवस मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिए गए निर्णय संबंधी पत्र जारी किया है। जिसमें आक्सीटोसिन का दुरुपयोग रोकने के लिए कार्रवाई का निर्देश दिया है। कहा है कि जल्द फसल तैयार करने के लिए किसान लौकी, कद्दू, टमाटर, खरबूजा, तरबूज, तोरई, खीरा सहित कई सब्जियों व फलों में पौधों में इंजेक्शन लगाया जा रहा है। इससे सब्जियां कुछ ही घंटों में तैयार हो जाती हैं। उनका आकार बढ़ जाने से मार्केट में उनका अच्छा दाम मिल जाता है।

आक्सीटोसिन है एक ग्रोथ हार्मोन

स्त्री रोग विशेषज्ञ डाक्टर शिखा शुक्ला ने बताया कि गर्भवती महिलाओं में प्रसव के समय इसका प्रयोग किया जाता है। आक्सीटोसिन अगर लगातार शरीर में जाता रहे तो इससे हार्मोनल बदलाव होने लगते हैं। जिससे बच्चों का शारीरिक विकास तेजी से होता है। इसका दुष्प्रभाव होने से नपुंसकता, माइग्रेन, कैंसर, पेट दर्द, ब्लड प्रेशर आदि बीमारियां बढ़ने लगती हैं। इतना ही नहीं हार्मोंस के डिसबैलेंस से आंख की रोशनी व दिमाग पर भी प्रभाव पड़ता है।

बोले जिम्मेदार..

आक्सीटोसिन इंजेक्शन की अवैध बिक्री, दुरुपयोग रोकने और प्रभावी नियंत्रण के लिए जिले में अभियान चलाया जाएगा। अभियान में पशुपालन व उद्यान विभाग को भी शामिल किया गया है। प्रदेश में सबसे अधिक 1800 वायल जौनपुर में तीन स्थानों से आक्सीटोसिन पकड़ी जा चुकी है। नकली दवाओं व आक्सीटोसिन की अवैध बिक्री के खिलाफ आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी।

-अमित बंसल, औषधि निरीक्षक।

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